heart touching shayari in hindi | sad shayari in hindi

heart touching shayari

दिल के चमन में इक फूल खिला हैं
मरहम लगा दो के जख़्म मेरा हरा हैं

आँखो में पैमान हैं लब मेरे बोल उठे हैं
ये बात आगे बढ़े तो कोहराम होना हैं

मशअले लेकर सीतरे मुझे ढूढ रहे हैं
मैं रास्ता भूल गया हूँ रात होने में हैं

मैं अकेला हूँ तन्हाई मेरा सहारा हैं
ख़ुद से ही बात करता हूँ मेरा कोई नहीं हैं

ग़म-ए-दिल, दिल से जाता ही नहीं
जो मुझे अपना ले वो मिला ही नहीं

ओस की बूदों की तरहा बिखरा हू
समेट ले मुझे वो दरिया मिला ही नही

बर्फ़ क्यू पिघल रहीं हैं पहाड़ों से
मैं तो अब कहीं रुका ही नहीं

ए किरण ले चल मुझे फ़लक पर
अभी तक मैंने अर्श देखा ही नहीं

किसी का चहेरा आज नज़र आया हैं
अब तक आईना मैंने देखा ही नहीं

दर्द ग़म का बोझ उठाए फिरता हूँ मैं
कोई सुने ऐसा कोई मिला ही नहीं

साया मेरा मुझसे जुदा हुआ हैं
तूने मुझे अब तक जाना ही नहीं

heart touching shayari

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फिज़ाओ ने चाँद को छुपा दिया खिडक़ी में
क़भी चराग़ भी जला था दिल की हवेली में

वो बेवफ़ा हैं साया हैं इक बेवफ़ाई का
गुज़र हुआ हैं मेरा दिल की उजड़ी हुई बस्ती में

झुकी पलकें आँखे अश्क़ बार सी हैं मेरी
बहोत बार गिरा हूँ मैं इस दलदल में

ज़माने भर से निराली हैं उसकी बेरुख़ी
दरिया पर किया मैंने उल्टी कश्ती में

जलाया ही क्यू था जब इतना क़ीमती दिल
अब क्या फ़ायदा आग पर राख़ डालने में

तेरी बेरुख़ी से इऱफान वाक़िफ़ सा हैं
बता औऱ रखा हैं तूने अपने दिल में

मुसाफ़िर हैं वो नए ज़माने के
नहीं रुकेंगे मेरे आशियाने में

इश्क़ में हारे हुए हैं हम
उसके राज़दार हैं हम

बातें उसकी किया करता था
मैं भी कभी शाई’री किया करता था

मश’अले लेकर अँधेरे में
मैं भी क़भी उसे ढूढा करता था

दिन में मिलना मुश्किल हैं तू रात में आ जा
क़भी किसी रोज तो तू मेरे ख़्वाब में आ जा

हसरत भरी निगाहों से यू ना देख मुझे तू
मसरूफ़ हूँ काम में मैं तू शाम में आ जा

बातें जो हैं कहने की अभी ना कहना तू
सारी गुफ़्तगू करेगें तू कल बाग में आ जा

तेरे लिए तु’अफ़े लेकर आऊँगा मैं रात
तू सिंगार कर के दुल्हन बन के आ जा

सुना सुना सा हैं तिरी बिन घर इरफ़ान का
तू अब मिरी अहलिया बन कर आ जा

अच्छा अँधेरे में तीर चलाते हो
तुम तो इशारे में बातें करते हो

जान लेते हैं हम तुम्हारी बातों को
जो तुम कहते हो वो करते नहीं हो

जब भी बात करते हो हवाओं करते हो
तुम इस फ़न के माहीर नहीं हो

तुम लफ्ज़ो की अदला बदली का खेल करते हो
अच्छा तुम दूसरे के अल्फ़ाज़ मिटा देते हो

इक हुन्नर तुम में कमाल का हैं
तेरा ये ज़माल फ़ालतू का है

तेरे रूठ जाने का मलाल नहीं हैं
तूने जो किया कमाल नहीं हैं

मैंने ही तुझे रौशन कर रखा था
तेरा अक्स कोई जलाल नहीं हैं

तू तो सारे अपने अहद भूल गया
तुझसे अब कोई सवाल नहीं हैं

अच्छा तो तुम ऐसे दिखतें हो
दूर से तो बड़े अच्छे लगतें हो

तुम शॉल ओढ़े क्यू फ़िरते हो
तुम तो बड़े ठंडे लगतें हो

सामने सब के खिंचे हुए रहते हो
तुम तन्हाई में बड़े शेर बनते हो

तुम नज़र कहीं औऱ रख़ते हो
बात किसी औऱ से करते हो

तुम कुर्बत में कुछ औऱ होते हो
तुम वस्ल में कुछ औऱ होते हो

साथ हो कर भी साथ नहीं होते हो
तुम चलते चलते ग़ायब हो जाते हो

तुम अब बड़े हो गये हो
फ़िर भी बचों की तरहा रोते हो

heart touching shayari

हर समस्या अपने साथ
अपने बराबर का या अपने से भी
बड़ा अवसर साथ लाती है ।

मुहब्बत हैं तो हिम्मत करो
सब के सामने इज़हार करो

दीवानों की तरहा पीछा करो
तुम उस से मुहब्बत करो

दिल पर उसका नाम लिख दो
हर चीज़ तुम उसके नाम करो

तुम उस से शिकायत न करो
तुम तो उसकी हिफाज़त करो

न दिल में रखा न पलकों पे बिठाया तुझे
फ़िर भी हमनें हद्द से ज़्यादा चाहा है तुझे

आधी रात का वक़्त हैं चाँद मेरा रहनुमा हैं
तू दूर हैं देख अपने पास बुला रहा हूँ तुझे

मेरी इन आँखों में अब ख़्वाब सारे तेरे हैं
नींद से जागू तो पास पाता हूँ मैं तुझे

मेरा मुनकिर नहीं हैं वक़्त लेक़िन देखना
वो कैसे मिलाता हैं मुझे औऱ तुझे

इश्क़ में बेक़रार दिल से मुलाक़ात करो
अब आप आ ही गये हो तो कुछ बात करो

पहले-पहल आया हैं मेरी ज़िंदगी में दिन
नक़ाब में ख़ुद को यू न छुपाया करो

नज़रों का नज़र से मेल अब होने दो
जो बात हैं दिल में ज़ुबा से बोला करो

कल लढाई में न मिला मुझे प्यार आपका
इतना ज़ुल्म ऐ जान तुम न किया करो

नज़रे मिला के फ़िर नज़रे फेर लेते हो
मेरे दिल को ऐसे न तड़पाया करो

ज़िन्दगी को हमेशा मुस्कुरा
के गुजारो
क्योंकि आप ये नही जानते
कि ये कितनी बाकी है

एक क़दम ज़िन्दगी हैं
एक क़दम पर मौत हैं

आदमितयत के सर पर
कैसी तबाही छायी हैं

अपने बेगाने हैं बेगाने
अपने बन गये हैं
वक़्त ने भी क्या ख़ूब
खेल खेला हैं

यहाँ हर किसी ने कुछ न
कुछ खोया हैं
प्यार मुहब्बत इश्क़ सब
झूठा हैं

ज़रा सी बात पर ख़फा होना आदत हैं उसकी
हर बात पर मुझे डराना भी आदत हैं उसकी

कहीं ये बात मिरी मौत की वजहा न बन जाए
कहीं हमें मौत न आ जाए बेरुख़ी से उसकी

जब वो मुस्कुराता था
मैं ग़म दर्द भूल जाता था

शिकन जब आती थी माथे पर
तब वो माथा चुम लिया करता था

कश्ती जब भी डूबने लगती थी
वो मुझे सहारा दिया करता था

उसकी हसीं आँखो पर मैं
सब कुछ लूटा दिया करता था

जज्बातों का एलान आँखो में हैं
मुहब्बत दर्द ग़म जो हैं आँखो में हैं

आँखो से बड़ा सच्चा कोई नहीं हैं
सारी बातें आँखो से ही होती हैं

आँखे ही मिलते दिल से दिल को
आँखे न मिली तो सब अनजान हैं

लब जो कहे वो हक़ीक़त नहीं हैं
सच झूठ की पहचान आँखो में हैं

आँख न उठे किसी ग़ैर की तरफ़
मुहब्बत की पहचान आँखे ही हैं

उसने जी भरकर चाहा था मुझे
बाद में उसका जी ही भर गया

heart touching shayari

मसला,यहीं हैं ज़नाब
वो चाहे दिल में रखें या निकाल दे
दिल उसका हैं ज़नाब
अपना होता तो बात कुछ औऱ होती

आमीर ने फ़नाह में शायरी सुना सुना कर
काजोल से मुहब्बत कर ली
औऱ एक हम हैं कितनी भी शायरी सुनाए
एक भी नहीं आतीं

नफ़सानी ख्वाहिश मुक्कमल करने
तूमने उल्फ़त का ढोंग रचा
बुझाकर प्यास जिस्मों की नाम तुमनें मुहब्बत रखा

heart touching shayari

heart touching shayari 2 line

तारों भरी पलकों की बरसाई हुई ग़ज़लें
है कौन पिरोए जो बिखराई हुई ग़ज़लें

वो लब हैं कि दो मिसरे और दोनों बराबर के
ज़ुल्फ़ें कि दिल-ए-शाइ’र पर छाई हुई ग़ज़लें

ये फूल हैं या शे’रों ने सूरतें पाई हैं
शाख़ें हैं कि शबनम में नहलाई हुई ग़ज़लें

ख़ुद अपनी ही आहट पर चौंके हूँ हिरन जैसे
यूँ राह में मिलती हैं घबराई हुई ग़ज़लें

इन लफ़्ज़ों की चादर को सरकाओ तो देखोगे
एहसास के घुँघट में शर्माई हुई ग़ज़लें

उस जान-ए-तग़ज़्ज़ुल ने जब भी कहा कुछ कहिए
मैं भूल गया अक्सर याद आई हुई ग़ज़लें

हाथों की लकीरों में सजा लू क्या तुझ को
मैं हूँ तेरा तू अपना बना ले ना मुझ को

तुझे भूल ही रहा था के तुम याद आ गए
मैं ज़हर पी ही रहा था के तुम याद आ गए

कल मेरा एक दोस्त क़िताब में फूल छुपा रहा था फूल देख कर तुम याद आ गए

रात मेरे सूने सहन में गुल खिल रहे थे
गुल को देखा तो तुम याद आ गए

इबादत कहो या कुछ औऱ कहो तुम इसे
मैं सर झुका रहा था औऱ तुम याद आ गए

कल मैं अपनी लिखी हुई ग़ज़ल गुण गुना रहा था के मुझे तुम याद आ गए

तेरे शहर के तरफ़ जा रही थी एक सवारी
सवारी को देख कर तुम आ गए

इरफ़ान हैं ये इश्क़ साजिशों का पिटारा
आज तेरे राज़ों से कोई पर्दा उठारा

लोगों को क्या बताते हो मुझे बताओ
तुम्हें क्या पता मुझे किस ग़म ने मारा

लफ़्ज तो तुम्हें मिलते नहीं मुझसे बात करने वाले
अब मैं समझ गया तुम मुझे दिल में नहीं रखने वाले

हक़ीक़त तो ये हैं के तूझे सुझाता ही कुछ नहीं
तुम मेरे नहीं किसी औऱ के हो होने वाले

ना पूछ मेरी दिल की कैफ़ियत क्या हैं अब
तुम तो हो मेरे बग़ैर जीने वाले

तक क्यू रहा हैं हसरत भी निग़ाहों से तू मुझे
कहीं तुझे इश्क़ ना हो जाए बेवफ़ाई करने वाले

अँधेरा हो या रौशनी हो तुझे इरफ़ान का वास्ता
मुझे अपने हाल पर छोड़ दे ऐ दिल दुखाने वाले

आयात को दिखाया जख़्म अब दुखने लगा हैं
आँखो में आँसू उमड़ पड़े जख़्म हरा होने लगा हैं

आयात ने क़रीब आ कर आदत लगा दी हैं
अब दिल से निकाल रही हैं क्या क़यामत आयी हैं

अब आहें मेरी उसे सुनाई नहीं देती हैं
मुहब्बत फ़ीकी पड़ी हैं दिल पर उदासी छायी हैं

एक सन्नाटा सा तारी हैं चारों ओर
ख़ैर उसके हिज्र में हमनें बहुत राती काटी हैं

इश्क़ का दस्तूर यहीं हैं दिल तू कब तक रोएगा
यहाँ इन हसीनाओं ने किस से वफ़ा निभायी हैं

मुहब्बत आग बन जाती हैं बेवफ़ाई के बाद
ख्वाहिशें जल जाती हैं दिल जल जाने बाद

इधर तुम उधर हम ये कैसा मुक़ाबला हैं
कितने अजीब हो गए मुझे छोड़ने के बाद

आओ आज तुम्हें दास्तान-ए-हिज्र सुना दे
दिन-ओ-रात का सुकून गया तेरे जाने के बाद

शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो गयीं दास्तां
ख्वाहिशें मुरझा गयीं तेरी बेरुख़ी के बाद

उन्हें जाने की बड़ी जल्दी सो चले गये वो
हम दिल को बहलाते रहें उसके जाने के बाद

उसकी आरज़ू मिट मिट के उभरने लगी हैं
ख्वाहिश जागने लगीं हैं उसके जाने के बाद

चराग़ मेरा फड़फड़ाकर कर बुझ ही गया
दम जो बाक़ी था वो निकल गया उसके जाने के बाद

मैं उसका तालिब हू चाहे वो मेरा न रहे
मुहब्बत उसकी बरक़रार रहेंगी उसके जाने के बाद

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