heart touching emotional sad shayari, [emotional sad shayari]

heart touching

काला लिबास उसे पसंद हैं
लेक़िन उसे मेरे काले रंग से नफ़रत हैं

काश कोई ऐसा हुआ करे
जो ख्वाहिशें ना गिला करे,
जो मेरे लिए ही सजा करे
जो मेरे लिए ही बना करे,
मैं जो रुठ जाऊं तो मनाए वो
मैं जब दूर जाऊं तो मेरी वापसी की दुआ करे,
दबे पांव साथ मेरे ही चला करे
काश कोई ऐसा हुआ करे
काश कोई ऐसा हुआ करे। ❤️😌🙌

तुम्हारी चाहत के बिना मैरी
इबादत पूरी नही होती है

तुम जिदँगी हो मैरी तुम बिन
मैरी जिदँगी पूरी नही होती है,

heart touching

मसलों का हल निकाला जाए
ख़ुद की ज़िंदगी ख़त्म न की जाए

जो आंखे आपको समझ सके,
वहीं दोस्त है…!
वरना खूबसूरत चेहरे तो,
दुश्मनों के भी होते हैं…!!

कोई इस दर्द की दवा ना हो सका
वो मेरा हो कर मेरा ना हो सका

heart touching

कोई तो कमी हैं शायद मुझ में
इक मिसरा मुझसे पूरा ना हो सका

कोई मिले तो उस से कहूगा दर्द
वो मेरा हो कर मेरा ना हो सका

उसके बाद मेरी किसी से जमी नहीं
मैं अब तक किसी का ना हो सका

सारी महफ़िल में मेरी ही बात हैं
लेक़िन मैं किसी से बात ना कर सका

अपने दर्द को लफ़्ज़ों में बयां करो
तुम खुदखुशी को ना अपनाया करो

सब्र का दामन थामे रखो तुम
सबको सब्र से ही जवाब दिया करो

ज़िंदगी क़ीमती हैं क़ीमत समझो
इसे तुम यू ना ख़ुद ही ख़त्म करो

नहीं बन पा रहीं हैं किसी से
तो तुम ख़ुद ही ख़ुद से बातें किया करो

एक ही तो जिंदगी दी हैं रब ने
उसे तुम यू न तबाह बर्बाद किया करो

जो हुआ उसे तुम छोड़ दो
तुम ज़िंदगी की नई शुरवात करो

heart touching

आफ़ताब ढला रात हो गई
सीतरे निकले चाँद भी आया
तू कहाँ रह गया मेरी जान
तू अब तक क्यू नहीं आया

रास्ते वीरान हो गए हैं
शहर सुनसान हो चुका हैं
तू किस गली में रह गया जान
तू अब तक घर क्यू नहीं आया

सब अपनों को सोहबत में हैं
प्यार भरी बातें कर रहे हैं
किस से बात करू
किसी को सोहबत में रहू
मेरी जान तू मुझे तन्हा क्यू कर गया

पुराना आया तो नए को भूल गया
यार वो तो मेरी मुहब्बत को भूल गया

टूटकर चाहा था मैंने उसे
यार वो तो मेरी चाहत को भूल गया

मुरझाए हुए को खिलाया हमनें
यार वो तो पानी देने वाले को भूल गया

उसे हमनें अपने दिल में जगहा दी
यार वो तो मेरा दिल तोड़कर चला गया

सब धुआँ धुआँ हैं यहाँ रौशनी थोड़ी हैं
हमें उस से मुहब्बत उसे हमसे थोड़ी हैं

तेरी हर बात सही हैं हम मानते हैं
लेक़िन हम भी तो कही न कही सही हैं

तुम्हें महबूब की बाहें सोने नहीं देती हैं
हमें यहाँ इऱफान की शायरी मार देती हैं

अगर वाकई में तुमको
कामयाब होना है तो अपने
बीते कल में जीना छोड़ दो

वो कहते रहे हमसे हम तुम्हारे है,
मगर वो ये बात केवल हमसे ही नहीं कहे

हर इक को नहीं मिलती मोहब्बत इरफ़ान
मोहब्बत किसी की जागीर नहीं हैं इरफ़ान

ये दुनिया-दारी और इरफ़ान का दावा
मियाँ इरफ़ान हो जाए तो दुनिया छोड़ देते हैं

दिन तो मैं काट लूँ मगर इरफ़ान
हिज्र में रात भी रखी गई है

सस्ता महँगा क्या होता हैं
मुहब्बत में सब बराबर होता हैं

तूने दिया क्या मैंने दिया क्या
सब कुछ अपना ही होता हैं

नाराज़गी गुस्सा प्यार सब कुछ
अपनों से ही होता हैं
हक़्क़ भी अपनों पर ही होता हैं

नाराज़ हो फ़िर भी बात करो
ऐसा मुँह किसी का नहीं होता हैं

heart touching

पानी से एक चीज सीखे… चाहे रस्ते
में कितनी भी मुसीबत आए… हमेशा
आगे बढ़ते रहो..!!

heart touching

मैं हर दिन की तरहा उसकी गली में गया
वो हर दिन की तरहा मुझे नहीं मिला

नज़र उठाकर देखता रहा खिड़की में
वो मुझे खिड़की में भी नहीं मिला

किस से कहता किस से पूछता मैं
वहाँ अपना कोई दोस्त भी न मिला

मायूसी के साथ लौट आया मैं घर को
यार वो हर दिन की तरहा मुझे नहीं मिला

मैं एक ही गुनाह बार बार करता हूँ
मैं हर बार तुझी से मुहब्बत करता हूँ

ख़ुदा नहीं बख्शेगा मेरी ये ख़ता
फ़िर भी मैं इश्क़ तुझी से करता हूँ

जानता हूँ तू नहीं हो सकता मेरा
फ़िर भी मैं तेरा ही होना चाहता हूँ

जानता नहीं क्या अंजाम होगा मेरा
फ़िर मैं तुझी से प्यार करना चाहता हूँ

भूल जा इऱफान वो तेरे लायक़ नहीं था
इऱफान तू तो अकेला ही अच्छा था

तूने फ़िज़ूल ही दिल लगाया था उस से
इऱफान भूल जा उसे वो तेरा नही था

जिसे कद्र होती हैं वो चल कर आता हैं
इऱफान वो तेरी कद्र करने वाला नहीं था

इऱफान तेरे अंदर तो इक हुन्नर हैं
वो हुन्नर को पहचान ने वाला नहीं था

तू ख़ुद को जलाता हैं उसकी बेरुख़ी से
भूल जा इऱफान वो तेरे लायक़ नही था

मैं वो ख़्वाब हु जो किसी ने न देखा
मैं वो किस्सा हु जो किसी ने न पढ़ा

शुरू कहां से करू
अपने आप से या तुम्हारे नाम से !
प्यार से
या हमारे बीच हुई तकरार से !

heart touching

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emotional heart touching sad shayari

जिन छोटी-छोटी बातों पर तुम मुस्कुराती थी
वो आज तुम्हें सब बेकार लगती हैं !
मोहब्बत की बातें तो जैसे
तुम्हारी जान ही लेती हैं !

सब कुछ अपना खो कर ही तो
मैंने तुझे पाया था !
कितनी आसानी से
तुने मुझे बेवकूफ़ बनाया था !

तुम कहती थी ना कि रिश्ते दिल के
सच्चे और पाक होते हैं !
अब तो सारे के सारे
मेरी नज़रों से तुम्हें दाग़ लगते हैं !

जिस मौसम की हम बातें करते थे
और उन्हें याद कर तुम आहें भरती थी !
वो आज बिल्कुल शांत हैं
तुम्हें बताऊं भी तो कैसे
कि दिल के अंदर आए ना जाने कितने तूफ़ान हैं !

शायद तुम्हें फर्क नहीं पड़ता
क्यूंकि तुम्हारे लिए ये आम हैं !
हर बार तुम्हें याद कर
जाती तो सिर्फ़ मेरी ही जान हैं !

मेरे हालात कभी बदले या ना बदले
पर सिर्फ़ एक बार तुम ये कह दो !
वो चांदनी रात और समंदर किनारे नंगे पांव
‘अहमद’ का हाथ पकड़ कर चलना
तुम्हें आज भी याद हैं !

क्यू करते हो इक दूजे नफ़रत
हम तो वतनी भाई हैं
मज़हब पहनावा अलग अलग हैं
लेक़िन खून का रंग तो एक ही हैं

ये नफ़रत की दीवार खुर्ची के कीड़ों
ने खड़ी की हैं इनसे इनकी रोजी जो
चली हैं इनका इस से घर जो चला हैं

heart touching

इन्हें दे दो इनकी नफ़रत वापस तुम
आओ एक दूसरे के साथ चलते हैं
तोड़कर इस दीवार को हम आओ
इक दूजे के गले मिलते हैं

हमारे आबा ओ अजदाद ने करुबानी
दी हैं इस मुल्क के लिए
आओ अब हम मिलकर इस मुल्क को
तरक्की की राह पर ले जाते हैं

तेरे नैनों के इशारे मैं नहीं समझता हूँ
कुछ समझता हूँ कुछ नहीं समझता हूँ
तेरा दिल मेरी समझ में आता हैं
लेक़िन तेरा चहेरा मैं नहीं समझता हूँ

क़भी क़भी तेरी ख़बर मुझे नहीं मिलती
क़भी क़भी तेरे बारे में नहीं समझता हूँ
जो हैं मेरे क़रीब जो हैं मेरी रक़ीब
मैं उन्हें अब अपना नहीं समझता हूँ

मैं ख़ुद जंग छेड़ रखी हैं अपने दिल से
मैं ख़ुद मुख्तिलिफ़ हूँ अपने दिल के
मैं ख़ुद अपने दिल को नहीं समझता हूँ

हर जागने वाला आशिक़ नहीं होता
हर लिखने वाले का दिल टूटा नहीं होता
सब की अपनी अपनी वजहा होती हैं
हर किसी ने इश्क़ किया नहीं होता

अक़्ल के घोड़े दौड़ाओ लफ्ज़ो की
गहराई को समझो तुम
हर ग़ज़ल हर शायरी हर शेर महबूब
पर नहीं होता

heart touching

कोई इश्क़ कोई बेवफ़ाई कोई तन्हाई
पर लिखता हैं
मैं वो हूँ जो ख़ुद पर लिखता रहता हूँ
शायर तो तुम्हें बहोत मिले होंगे यहाँ
लेक़िन इरफ़ान जैसा कोई नहीं होता

खुद को आप इतना बेहतर
बनाएं कि
जो कल आप थे,वह आज
ना रहें…

मालूम था मालूम है की कुछ भी नहीं हासिल होगा, लेकिन वो इश्क ही क्या जिसमें ख़ुद को तड़पाया ना जाये !!”💔

अपनी ना-काम मुहब्बत का मातम न कर
चला गया हैं वो तुम अब ग़म न कर
औऱ भी बहोत तरीक़े हैं ख़ुश रहने के यहाँ
तू मुस्कुराती आँखो को नम न कर

एक रोज कोई आएगी सारी फुरसते लेकर ,
एक रोज हम कहँगे जरूरत नही रही

मुश्किलों को देख जो घबरा गए।
छोड़कर वे राह वापस आ गए।

हो गया प्रतिकूल उनके फैसला।
दंड अपनी गलतियों का पा गए।

माफ जिनको कर दिया था आपने।
वे दुबारा से सितम फिर ढा गए।

दुश्मनों से तो लड़ाई जीत ली।
मात अपने दोस्तों से खा गए।

ओट में जाकर के सूरज छिप गया।
आस्मां पर फिर से बादल छा गए।

झूठ जैसा सच उन्हें लगने लगा।
मानकर सच झूठ को भरमा गए।

कल तलक कश्यप चमन की शान जो।
दूसरे दिन फूल वे मुरझा गए।

वो लड़की मेरा कतल करवाए गी किसी दिन
अपने व्हाट्सएप पर मेरी तस्वीर लागए फिरती है

ऐ दहेज मांगने वाले, जा तेरे यहां खुदा का ऐसा करम हो…,
जब जब तेरी बीवी उम्मीद से हो तो बेटी का जनम हो…

हमारी बुज़दिली मशहूर है ज़माने में
के हम बदला नहीं लेते, ख़ुदा पर छोड़ देते हैं

इन हुस्न वालों की कितनी दिलचस्प हैं अदाए
कुछ देर हँसाए फ़िर उम्र भर हमें हैं रुलाए

heart touching

परेशां हैं हम के अब किधर को जाए
जिस तरफ़ भी हम जाए उन्हें ही पाए

गुजरी हैं मेरे क़रीब से अजीब सी फिजाएं
ये आधी रात में किसका साया मेरे क़रीब आए

अब देखना हैं के क्या होना हैं आगे
बदली हैं हवाए बदली हैं फिजाए बदली हैं घटाए

हिचकियां अब सिसकारियों में बदल गयी हैं
मायूस हैं आरजुए मेरी नाकाम हैं मेरी इल्तिज़ाए

जाफ़रनियो ने ख़ाकी चड्डी पहनी हैं
इन दिनों मुल्क में बहूत तबाही की हैं

कमीज़ पहना हुआ सुफेद हैं
न इन में थोड़ी सी भी तमीज़ बाक़ी हैं

अलम इनका नारंगी हैं
तीन रंग इन पर भारी हैं

हिस्सा इन्होंने नहीं लिया आझादी में
फ़िर भी वतन के ठेकेदार बने आज हैं

इनका मंसूबा वाहिद इक ही हैं आज
हिंदुस्तान के आइन को बदलना हैं

इनका ख़्वाब क़भी मुक्कमल न होगा
इनकी सालगिराह पर कुछ नहीं होना हैं

ख़ुद ही अपनों के शिकार होंगे ये
जो सोए हैं अभी उन्हें जागना भी हैं

उपर से हरा अंदर से नारंगी हैं
नागपुरी संतरा बड़ा फ़रेबी हैं
उपर से मीठा अंदर से खट्टा हैं
इसका रस न पीना बड़ा कड़वा हैं

हर जगहा ये जाता रहता हैं
हर जगहा ये कड़वाहट घोलता हैं
छिलका इसका ज़मी पर न फेकना
ये जहाँ जगहा मिले पैर फैलता हैं

गोरे सेफ से नारंगी का रिश्ता हैं
वो मालिक हैं ये उसका नौकर हैं
गोरे सेफ के ईशारे पर ये रंग बदलता हैं
जो वो कहता हैं वो ये करता जाता हैं

बड़ा दाम मिलता हैं इसे वहाँ से
तब जा कर ये हर जगहा बिकता हैं

“कुछ करने की इच्छा
रखने वाले व्यक्ति के लिए !
इस दुनिया में “असंभव”
कुछ भी नहीं

खुशबुओं से दूर दूर रहता हूँ
मैं इक तितली की बदुआ लिए फ़िरता हूँ

झूट कहते है वो लोग के हम सब मिट्टी के बने है
मैँ कई लोगो को जानता हू जो पत्थर के बने है

तेरे जाते ही आँखे अश्क़ बार हो गई
आँखों में आँसू हैं आँखे भारी हो गई
उमर तू हो गया रुख्सत इस जहाँ से
उदास उदास मेरी दुनियां हो गई

मैं अपने ग़म का इलाज़ चाहता हूँ
मैं भी दिलदार सनम चाहता हूँ
जो लगाए रखें मुझे अपने सीने से
मैं ऐसा वफ़ादार यार चाहता हूँ

किस के इंतेज़ार में ये रातें काली हैं
दिन नहीं निकला हैं उजाले कहा हैं

मिला तू मुझे देर से क्यू हमेशा
तुझसे ये शिकायत रहेंगी
लगा ले तू मुझे गले बन बताए
तुझे उम्र भर इजाजत रहेंगी
मुझे अब कोई गम रुला ना सकेगा
क्यू की तू बहाना हैं मेरी हँसी का

बादशाह सिर्फ वक्त होता है,
इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है

जिंदगी के उतार चढ़ाव में
तुम ठहराव सी थी।

वो वक्त वो लम्हे अजीब होंगे,
दुनियाँ में हम खुश नशीब होंगे,

दूर से जब इतना याद करते हैं आपको,
क्या हाल होगा जब आप हमारे करीब होगे.

emotional sad shayari hindi

न मिले किसी का साथ तो हमें याद करना,
तन्हाई महसूस हो तो हमें याद करना….,

खुशियाँ बाटने के लियें दोस्त हजारो रखना,
जब ग़म बांटना हो तो हमें याद करना !!

दर्द की धूप से चेहरे को निखर जाना था
आइना देखने वाले तुझे मर जाना था

राह में ऐसे नुक़ूश-ए-कफ़-ए-पा भी आए
मैं ने दानिस्ता जिन्हें गर्द-ए-सफ़र जाना था

उसकी आँखों में मुहब्बत का सितारा होगा
एक दिन वो शख्श हमारा होगा
जिंदगी अब के मेरा नाम न शामिल करना
ग़र ये तय हैं ये खेल दुबारा होगा

heart touching

तड़प के देखो किसी की चाहत में !
तो पता चले कि इंतज़ार क्या होता है !

यूँ ही मिल जाये अगर कोई बिना तड़पे !
तो कैसे पता चले के प्यार क्या होता है !!

अब कोई आएगा नहीं मैं तन्हा ही सही
कट जाएगा वक़्त कोई बात नहीं
ये मेरा दर्द ग़म हैं मैं ख़ुद लूगा इस से
तुम आए नहीं कोई बात नहीं

पहेले भी अकेला था अब अकेला हु
मैं परेशां ही सही कोई बात नहीं
ज़िंदगी हैं कट ही जाएगी धीरे धीरे
कोई हमसफ़र नहीं कोई बात नहीं

यू तो हमें मुहब्बत हैं तुमसे बहूत हैं
तुम्हें नहीं तो कोई बात नहीं
मैं तुम्हारी ख़ातिर खुद को बदल नही
सकता मैं तुम्हें पसंद नहीं
तो कोई बात नहीं

बेतरतीब हैं तुम्हारा इश्क़
इसे तरतीब में लाओ
मुझे पसंद नहीं हैं तुम किसी
और के हो जाओ

आज वीराना अपना दिल देखा
मैंने कई बार दिल मे झाक के देखा
दिल टूटा हुआ नज़र आया
मैंने दिल में एक खंडर भी देखा

काट गई बिल्ली मेरा रास्ता
प्यार से ग़र किसी का रास्ता देखा
गलियों में वीराना देखा
मोहल्ले में मैंने बड़ा बदलाव देखा

दिल को जब मेरे चोट लगी
तब मेरा जख़्म किसी ने नहीं देखा
मैं खड़ा था राह देखते जिसकी
उसको मैंने किसी औऱ के साथ देखा

शा’इर ही समझ सकता हैं लफ़्ज़ों की हकीकत
हर किसी के पास शायर की नज़र नहीं होती हैं

दिन में मिलना मुनासिब नहीं हैं
तू रात में आ जा
कभी किसी बहाने से तू मुझसे
बात करने को आ जा

तू भी मशगूल मैं भी मशगूल हूँ
ऐसा कर तू सारा काम निपटा कर
शाम में आ जा

दो बातें करेगें हम मिलकर प्यार की
तू ऐसा कर इतवार को आ जा

तू जो कर रहीं हैं वो तेरे लिए जरूरी
मैं जो कर रहा हूँ वो हमारे लिए जरूरी
वक़्त नहीं हैं दोनों के पास भी
ऐसा कर तू वक़्त मुक़र्रर कर के आ जा

न शिक़वा करुगा न शिकायत करुगा
बस तू मुझसे मिलने को आ जा

दिल से निकली आह वापस नहीं जाती
आशिक़ों की बदुआ खाली नहीं जाती
इश्क़ में बदुआ नहीं जाती
हाँ लेक़िन बेवफाओं को जरूर दी जाती

ये दिल की तड़प हैं दिल की बेचैनी हैं
कम नहीं की जा जाती
जो जफ़ा करे हमारे साथ
हमारे यहाँ जफ़ा की सज़ा दी जाती

हम अदब वाले हैं हाथ नहीं उठाते हैं
हम दिल से निकाल देते हैं
हमारे जहाँ नज़रों से इज़्ज़त उतर जाती

हमनें तुम्हें दिल में बसाया था
तुमनें हमारा दिल तोड़ दिया हैं
हम शायर हैं
शायर की बदुआ खाली नहीं जाती

heart touching

अपनों से बस उतना
रूठो कि आपकी बात
और सामने वाले की
इज्जत बरकरार रहे

तेरे सिवा कोई मेरे जज़्बात में नहीं,
आँखों में वो नमी है जो बरसात में नहीं,

पाने की कोशिश तुझे बहुत की मगर,
तू एक लकीर है जो मेरे हाथ में नहीं।

मिलके बिछड़ना दस्तूर है जिंदगी का,
एक यही किस्सा मशहूर है जिंदगी का,

बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते,
यही सबसे बड़ा कसूर है जिंदगी का।

अगर इख्तिलाफ हैं तो रहने दो
लेक़िन तुम ऐसे ना मुँह फेरों

एक पल की ये बात नहीं,
दो पल का ये साथ नहीं,

कहने को तो जिन्दगी 
जन्नत से प्यारी है,

पर वो साथ ही क्या 
जिसमें तेरा हाथ नहीं.

नजरे जो झुकाओगे तो दीदार कैसे होगा,
निगाहें जो छुपाओगे तो इकरार कैसे होगा,

प्यार में तो होती हैं आँखों से बातें…
आँखे जो चुराओगे तो प्यार कैसे होगा !!

मोहब्बत अगर ऐब देखती ना,
तो हमारा ”रब” कभी हमारी तरफ़ ना देखता.!!

हजारों पीर बदले
पर उसका साया नहीं जाता।

जब से उसे खोया हूं
तब से खोया खोया रहता हूं।

तकीये के नीचे दबा कर रखता हूं
उसका ख्याल
एक तस्वीर, बेपनाह इश्क और बहुत सारे साल।

फिर से इक बार उसे खुद पे सितम ढाने दूँ
यानी वो लौट के आए तो उसे आने दूँ

मुड़े-मुड़े से है किताब ए उम्र के हर पन्ने..
ये कौन है जो मुझे,मेरे बाद पढ़ता है…

कपड़े उतारने का दौर चल रहा है
कोई ऐसा ढूंढों जो तोहफे में
तुम्हें चादर दे,

आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो
साया कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो

जब शाख़ कोई हाथ लगाते ही चमन में
शरमाए लचक जाए तो लगता है कि तुम हो

संदल से महकती हुई पुर-कैफ़ हवा का
झोंका कोई टकराए तो लगता है कि तुम हो

ओढ़े हुए तारों की चमकती हुई चादर
नद्दी कोई बल खाए तो लगता है कि तुम हो

जब रात गए कोई किरन मेरे बराबर
चुप-चाप सी सो जाए तो लगता है कि तुम हो

नसीबों के खेल भी अजीब होते हैं,
प्यार में आंसू ही नसीब होते हैं,

कौन होना चाहता हे अपनों से जुदा,
पर अक्सर बिछड़ते हैं वो जो करीब होते हैं..

अशआ’र मिरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं
कुछ शेर फ़क़त उन को सुनाने के लिए हैं

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं

हम से भागा न करो दूर ग़ज़ालों की तरह
हम ने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह

ख़ुद-ब-ख़ुद नींद सी आँखों में घुली जाती है
महकी महकी है शब-ए-ग़म तिरे बालों की तर

लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से

हाए उस वक़्त को कोसूँ कि दुआ दूँ यारो
जिस ने हर दर्द मिरा छीन लिया है मुझ से

सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी
तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी

उन से यही कह आएँ कि अब हम न मिलेंगे
आख़िर कोई तक़रीब-ए-मुलाक़ात बनेगी

ऐ नावक-ए-ग़म दिल में है इक बूँद लहू की
कुछ और तो क्या हम से मुदारात बनेगी

ये हम से न होगा कि किसी एक को चाहें
ऐ इश्क़ हमारी न तिरे सात बनेगी

ये क्या है कि बढ़ते चलो बढ़ते चलो आगे
जब बैठ के सोचेंगे तो कुछ बात बनेगी

emotional shayari for love

जब तक अल्फाज मेरे महसूस ना होंगे ,
मोहब्बत के परिंदे रूह कैसे छूं पाएंगे

एक अधूरापन था जो कभी पुरा हुआ नहीं
एक शख्स था मेरा जो कभी मेरा हुआ नहीं।

मेरे लहज़े मेरी बात का आईना हैं
मेरी हर ग़ज़ल मेरा आईना हैं

बिखरी हुई ज़िन्दगी ख़्वाहिशों का समा हैं
मेरा हर शेर दिल के जज़्बात का आईना हैं

heart touching

मेरे चहेरे को तुम ज़रा गौर से तो देखो
मेरा चहेरा मेरी हालात का आईना हैं

सर सब्ज जवानी हैं मेरी
ये जवानी मेरे जख्मों का आईना हैं

वो मेरी जाने-जा वो मेरी जाने-तमन्ना
उसकी याद मेरे जज़्बात का आईना हैं

मैं उलझनों में उलझता जा रहा हु
ज़िन्दगी से मैं घबराता जा रहा हु

मैं अपने ग़म से दूर होता जा रहा हु
मैं खुद की खुद को समझता जा रहा हु

दिख मुझे मैं रहा हैं संभलता जा रहा हु
गुमाँ ये भी के मैं धोखे खाते जा रहा हु

ग़र मुमकिन हो तो ले लो आग़ोश में
उन्हें ख़बर कर दो के मैं जा रहा हु

मुहब्बत की हदों से मैं दूर जा रहा हु
क़यामत बहोत क़रीब हैं मैं जा रहा हु

कभी कभी अल्फाज़ नहीं मिलते जज़्बातों को बयां करने को..
पर आँखें वो राज उगल देती जो दिल मे दबे होते हैं…..
ये आँखे सच में बहुत सुन्दर कृति है उस खुदा की…

इन आँखों में जो समन्दर की गहराई है,
खुदा ने भी वक्ते फुरसत से इन्हें बनाई है
न जाने कितनी मुद्दते लगी होगी इसमे
आफरीन-ए-नूर जो इनमें छिपाई है..

जब मिलो किसी से तो जरा दूर का रिश्ता रखना,
बहुत तङपाते है अक्सर सीने से लगाने वाले !!

अपने मांग में सजा ले मुझ को
मैं तेरा हु अपना बना ले मुझ को

ग़र काटा हु तो बचा ले दामन अपना
अगर फूल हु तो बालो में सजा ले मुझ को

मैं तेरा हु तेरा ही रहुगा हमेशा
ज़िन्दगी जान कोई भी नाम से बुला ले मुझ को

वफ़ा के धागे से बाधा हैं तूने मुझको
अब तू ही बता मैं कैसे छुड़ाऊं खुद को

कल की बात और हैं आज मैं तेरा हु
जितनी मर्ज़ी चाहे उतना सता ले मुझ को

अब ख़बर नही शहर में दीवानों की
कोई पहचान बाकी नही परवानों की

गर्द गुबार बिखरे हुए बाल लिबाज़ पुराना
खुद की धज्जियां उड़ा रहे हैं गरेबाँ की

कहानियां मशहूर होती जा रही है उनकी
इसी के साथ सरहदे टूटती जा रही हैं मुहब्बत की

heart touching

जख़्म दिल के हरे हुए चमन में फूल बिखरे है उनके
डोली में बैठ गैर के साथ जा रही हैं जान उनकी

उनको ख़बर नही के पार लगा या डूब गया वो
जो बहस किया करते थे उनसे उसका होने की

तेरी बेवफ़ाई का कोई मलाल नही
तूने जो किया वो कोई कमाल नही

यहाँ सभी करते हैं औऱ कर रहे
तूने कुछ नया किया नही

चहेरे पर तुम्हारे मुस्कुराह नहीं
मेरा दिल तोड़कर तुम ख़ुश नहीं

राहे बदल रहे हो मुझे देख कर तुम
क्या तुम्हारी मेरी मंज़िल एक नहीं

जाना तो सभी को हैं इस जहाँ से
फ़िर साथ चलने में कोई हर्ज नहीं

चाहो तो तुम अब भी लौट के आ सकते हो
मुझे तुमसे अब भी कोई गीला नहीं

गुलों में रंग भरने आ जाओ
फूलों का कारोबार हैं तुम करने आ जाओ

मुरझा गये हैं पौधे सारे यहाँ
तुम इन्हें सर सब्ज करने आ जाओ

कोई नही हैं तने तन्हा हुँ
तुम मेरा साथ ज़िन्दगी भर निभाने आ जाओ

सारी खुशियाँ तुम्हारे क़दमो में डाल दूगा
तुम मुझसे शादी कर मेरे घर को रौशन करने आ जाओ

बेवफ़ा से दिल लगाया था वफ़ा काम न आयी
धोखा खा कर भी तुझे अक्कल न आयी

अग़र मिले फुर्सत तो तुझे बताऊंगा
इश्क़ क्या होता हैं तुझे मैं सिखाऊंगा

अब ये शाम ढ़ले तो मैं बात करुगा
मैं तुझसे कल सुबहा बात करुगा

मेरी वफ़ा को उसने जफ़ा कह दिया
ख़ैर मैं ख़ुश हु उसने कुछ तो कह दिया

ज़हर न दे दे वो घोल कर पैमाने में
अब डर लगता हैं उसकी चाय पिने में

सारा माझी सिमट आया है मेरी आँखों में
मैंने शहर से दूर घर बना रखा हैं वीराने में

बे-सबब बदला मिज़ाज उनका बदलाव आया हैं मौसम में
कुछ गलत लोग चले आये हैं आज मेरे घर में

heart touching

मैं कैसे बताऊँ के मैं तन्हा क्यू हुआ
वो जो मेरा था वो गैर क्यू हुआ

यही तक़दीर हैं तो मेरे साथ क्यू हुआ
यही होना था तो आख़िर में क्यू हुआ

उसने हाथ बढ़ा कर पीछे क्यू किया
दिल मे हमारे बस के वो दूर क्यू हुआ

दिल-ओ-जान से चाहा फ़िर फासला क्यू हुआ
मेरी बर्बादी में वो शामिल क्यू हुआ

सुना था प्यार का रिश्ता जन्मों जन्मों होता हैं
फ़िर हमारे रिश्ते में ये बदलाव क्यू हुआ

माँग में तेरे सिंदूर भर तुझे अपना बनाना चाहता हूँ
जान मैं तुझे बहोत प्यार करना चाहता हूँ

साथ फेरों को साक्षी मान कर
मैं तेरा साथ सात जन्मों तक निभाना चाहता हूँ

गले में तेरी मालए डाल
मैं तेरे गले का हार बनाना चाहता हूँ

सजा के तुझे लाल जोड़े में
तुझे मैं अपनी दुल्हन बनाना चाहता हूँ

भीड़ में सभी लोग अच्छे
नहीं होते और अच्छे लोगों
की कभी भीड़ नहीं होती

  सुप्रभात

खूबसूरती न “सूरत” मे है
न लिबास में

निगाहें जिसे चाहे उसे
“हसीन” कर दे …!!✍️

तुमने देखा नही हमें मूड कर,
हम खुद को भूल गए.
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heart touching
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कभी कभी याद में उभरते हैं नक़्श-ए-माज़ी मिटे मिटे से, वो आज़माइश दिल ओ नज़र की वो क़ुर्बतें सी वो फ़ासले से

कभी कभी आरज़ू के सहरा में आ के रुकते हैं क़ाफ़िले से, वो सारी बातें लगाव की सी वो सारे उनवाँ विसाल के से

निगाह ओ दिल को क़रार कैसा नशात ओ ग़म में कमी कहाँ की, वो जब मिले हैं तो उन से हर बार की है उल्फ़त नए सिरे से

बहुत गिराँ है ये ऐश-ए-तन्हा कहीं सुबुक-तर कहीं गवारा, वो दर्द-ए-पिन्हाँ कि सारी दुनिया रफ़ीक़ थी जिस के वास्ते से

तुम्हीं कहो रिंद ओ मोहतसिब में है आज शब कौन फ़र्क़ ऐसा

ये आ के बैठे हैं मय-कदे में
वो उठ के आए हैं मय-कदे से

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया

किस लिए जीते हैं हम किस के लिए जीते हैं
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया

कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया

तंग आ चुके हैं तेरी हरकतों से हम
ठुकरा न दे कही तुझे बे-दिली से हम

मायूसी-ए-मआल-ए-मोहब्बत
मत पूछो अपनो से भी पेश आ रहे हैं बे-दिली से हम

ले आज छोड़ दिया तुझे तोड़ दिया रिश्ता
अब शिकवा गीला नही करेंगे किसी से हम

उभरेंगे फ़िर कभी अभी दिल पे छाले हैं
दब गए हैं भार-ए-ज़िन्दगी से हम

ग़र मिल गए कभी इत्तेफ़ाक से हम
ख़ुदा कसम मूड के भी न देखेंगे हम

तन्हा ही दर्द झेलेंगे किसी को नही बतायेंगे
जब तक आँखो में आँसू हैं तब तक जियेंगे

तुम्हारी बातें तुम जानो हम अपनी कहते रहेंगे
देर न करना तुम आने में वरना हम चले जायेंगे

इश्क़ कर के इतरा इठला रहे हो तुम
चार दिन ठहर जाओ तुम भी मेरे जैसे हो जाओगे

अच्छी शक़्ल खूबसूरत लोग बेवफ़ा होते हैं
हम तुम्हे उस दिन राय देंगे जिस तुम धोखा खाओगे

ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो रह-ए-आम तक न पहुँचे
मुझे ख़ौफ़ है ये तोहमत तिरे नाम तक न पहुँचे

मैं नज़र से पी रहा था तो ये दिल ने बद-दुआ दी
तेरा हाथ ज़िंदगी भर कभी जाम तक न पहुँचे

वो नवा-ए-मुज़्महिल क्या न हो जिस में दिल की धड़कन
वो सदा-ए-अहल-ए-दिल क्या जो अवाम तक न पहुँचे

मेरे ताइर-ए-नफ़स को नहीं बाग़बाँ से रंजिश
मिले घर में आब-ओ-दाना तो ये दाम तक न पहुँचे

नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है
ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे

ये अदा-ए-बे-नियाज़ी तुझे बेवफ़ा मुबारक
मगर ऐसी बे-रुख़ी क्या कि सलाम तक न पहुँचे

जो नक़ाब-ए-रुख़ उठा दी तो ये क़ैद भी लगा दी
उठे हर निगाह लेकिन कोई बाम तक न पहुँचे

उन्हें अपने दिल की ख़बरें मिरे दिल से मिल रही हैं
मैं जो उन से रूठ जाऊँ तो पयाम तक न पहुँचे

वही इक ख़मोश नग़्मा है जान-ए-हस्ती
जो ज़बान पर न आए जो कलाम तक न पहुँचे

न किसी का यार हूँ न किसी का प्यार हूँ
किसी के काम आउँ इतना होशियार नही हूँ

न किसी की दवा हूँ न किसी की नज़र हूँ
न इधर हूँ न उधर हूँ न किसी का करार हूँ

अपना मुझसे जुदा हुआ मैं टूटा हुआ घर हूँ
जो टूटकर बिखर गया मकान मैं उसका पाय हूँ

पढ़ फ़ातिहा फूल चढ़ाकर आया हूँ
एक चिराग़ मैं दिल में लगाकर आया हूँ

न इश्क़ हूँ न ग़ुरूर हूँ न किसी का सुहाग हूँ
जो बिखर गया वो आईना हूँ न किसी का सिंगार हूँ

मैं इतना हसीं कहा हूँ कौन देखेगा मुझे
मैं ला-इलाज मर्ज हूँ ग़मो की पुकार हूँ

किस के कहने पर तु मुझे छोड़ बैठा हैं
मैं कोई ग़म तो जो तू दूर जा के बैठा हैं

बात कुछ हुई ही नही जो तू रूठा बैठा हैं
ऐब हैं क्या मुझ में नज़रे झुका क्यू बैठा हैं

इश्क़ कोई खेल नही जो तू बिगाड़ बैठा हैं
ये कोई रसम नही जो तू छोड़ बैठा हैं

heart touching
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मैंने कुछ कहा नही तू आँसू लाए बैठा हैं
क्या तू मुझसे कोई राज़ छुपा के बैठा हैं

प्यार अरमान नही जो निकाल के बैठा हैं
मुहब्बत अफ़वाह नही जो उड़ा के बैठा हैं

ये कोई आग नही जो तू लगा के बैठा हैं
दिल को लकड़ी नही जो तू जला के बैठा हैं

कोई ख्वाइश तो नही जो तू दबा के बैठा हैं
दुप्पटा पर्दा तो नही जो तू लगा के बैठा हैं

क़रीब जो उसके गैर आ के बैठ गया
जल उठा दिल मेरा जी बैठ गया

वो अपना मिज़ाज़ बदल के बैठ गया
वो उसकी कुर्बत के साए में बैठ गया

रक़ीब बता कर वो उसके पास बैठ गया
थाम के हाथ वो उसके करीब बैठ गया

जो हुआ उसकी सफ़ाई दिये बिन बैठ गया
वो मेरे दिल को रेज़ा रेज़ा कर के बैठ गया

बे-दर्दी से दिल को घायल कर के बैठ गया
वो दिल के टुकड़े टुकड़े कर के बैठ गया

ये हसीनाएं भी बेवफ़ा कितने हैं
बुत बन के सुन रहे हैं बे-शर्म कितने हैं

उस रोज…
‌आसमां से छनकर गिरते बूंदों में किसी के आंसुओं की कल्पना कर लेना, और सुजान के आंगन की मिट्टी में मिलन की अनुभूतियों के साथ एकाकार हो जाने की तीव्र तालसा …
यही तो प्रेम है !!!
धन्यवाद।

heart touching

हमारी अपनी फकीरी है..बादशाही है
हमारे मसले दरबार तक नहीं जाते..!!

ज़ख़्म जो तुमने दिया वो इसलिए भी हरा रखा
ज़िन्दगी में क्या बचेगा, ज़ख़्म भर जाने के बाद।

Girlfriend ki शादी थी हमें बुलावा नही आया
हम भी कहा चुकने वाले थे !
गार्डन से दूर खड़े होकर अदंर जाते लोगों को गिनते रहै जैसे ही 200 क्रास हुये पुलिस को फोन कर दिया.
दुल्हा दुल्हन सहित सब अंदर
“ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा”
😄😄

ख़्वाब ही तो मिले हैं हमें रोटी के ख़्वाब ता’लीम के ख़्वाब
हुक्मरानों ने दिखाए आज़ादी के बा’द नई तंज़ीम के ख़्वाब
पैंसठ साल के बा’द भी हम करते हैं उन की क़दम-बोसी
हुक्मरानों ने क्या घोल कर दिए हैं इस यक़ीं के ख़्वाब
ना सड़क ना बिजली ना पानी ना रोज़गार है मयस्सर
मुल्क के इक्कीसवीं सदी में पहुँचने के ये हसीन से ख़्वाब
मत आवाज़ उठा मत माँग इंसाफ़ जरा सा डर प्यारे
वर्ना तू देखेगा हवालात में बैठ के नंगी ज़मीन पे ख़्वाब
आँखों में भर ले हक़ीक़त के काँच के टुकड़े ताकि खुली रहें
जागते हुए तय करें हम ख़ुद के लिए बेहतरीन से ख़्वाब

जो ख़फ़ी थे वो जाफ़रानी हो गये
ये ग़द्दार कब वफ़ादार हो गये

चिठिया लिख के मुआफ़ी माँगी जिन्होंने
अब वो वतन परस्ती का प्रमाण देने वाले हो गये

जाफ़रानी रंग की इबादत करने वाले
अब जन-गन-मन गाने वाले हो गये

अंदर कुछ हैं बाहर कुछ औऱ हैं
ये मुनाफ़िक़ कब ईमान वाले हो गये

काश तू समझ सकता मोहब्बत के उसूलों को…..
किसी की साँसों में समाकर उसे तन्हा नहीं करते…❤️

दिल मेरा है तो हुकूमत भी मेरी होगी,
वो दिन गये जब तुम अस्हाब हुआ करते थे ।

कहाँ जाऊँ तेरे दायरे से बाहर …..
खुद को महफूज किया है तेरी पनाहों में!!

कितनी अजीब है इस शहर की तन्हाई भी,
हजारों लोग हैं मगर कोई उस जैसा नहीं है।😔

आंखें पढ़ो, और जानो हमारी रज़ा क्या है….!!
हर बात लफ़्ज़ों से बयान हो, तो मज़ा क्या है….!!

अपने आप से बातें करना सीखिए
हमेशा लोग साथ नही रहते आपको सुनने के लिये।😔

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कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे
तूने आँखों से कोई बात कही हो जैसे
जागते-जागते इक उम्र कटी हो जैसे
जान बाकी है मगर साँस रुकी हो जैसे

हर मुलाकात पे महसूस यही होता है
मुझसे कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे

राह चलते हुए अक्सर ये गुमां होता है
वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे

एक लम्हें में सिमट आया सदियों का सफ़र
ज़िन्दगी तेज़ बहुत तेज़ चली हो जैसे

इस तरह पहरों तुझे सोचता रहता हूँ मैं
मेरी हर साँस तेरे नाम लिखी हो जैसे
कोई फरियाद…

अब कोई आस ना उम्मीद बची हो जैसे
तेरी फ़रियाद मगर मुझमें दबी हो जैसे
जागते-जागते इक उम्र कटी हो जैसे
अब कोई आस ना उम्मीद बची हो जैसे

रस्ते चलते हैं मगर पाँव हमें लगते हैं
हम भी इस बर्फ़ के मंज़र में जमे लगते हैं
जान बाकी है मगर साँस रुकी हो जैसे

वक़्त के पास लतीफे भी हैं मरहम भी है
क्या करूँ मैं कि मेरे दिल में तेरा ग़म भी है
मेरी हर साँस तेरे नाम लिखी हो जैसे
कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे

किसको नाराज़ करूँ, किससे खफ़ा हो जाऊँ
अक्स हैं दोनों मेरे किससे जुदा हो जाऊँ
मुझसे कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे

रात कुछ ऐसे कटी है कि सहर ही न हुई
जिस्म से जां के निकलने की ख़बर ही ना मिली
ज़िन्दगी तेज़ बहुत तेज़ चली हो जैसे

कैसे बिछडू़ँ कि वो मुझमे ही कहीं रहता है
उससे जब बच के गुज़रता हूँ तो ये लगता है
वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे

वक्त का इंतज़ार कीजिये जनाब
वादा है ,
बहुत बेहतरीन जवाब देंगेll

कोई मिलता नही दर्द ग़म बाटने के लिये
मैं बेचैन फिरता हूँ हमसफ़र के लिये

अपने दोस्तों हमउम्रों को देखकर सोचता हूँ
मैं भी तो यहाँ आया हूँ ख़ुश रहने के लिये

दीवार जो बनाई थी वो टूटकर बिखर गयी
अब मैं मकान तामीर करू किस के लिये

दो पल में ही वो मुझसे बिछड़कर चला गया
मैंने कोशिश बहोत की उसे रोकने के लिये

अपने क्या ग़ैर क्या पराये क्या
यहाँ हर कोई आया हैं बिछड़ने के लिये

तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद…

कितना भी चाहो ना भूला पाओगे
हमसे जितना दूर जाओ नज़दीक पाओगे
हमे मिटा सकते हो तो मिटा दो
यादें मेरी, मगर….
क्या सपनो से जुदा कर पाओ गे हमे😞😞😞🤗🤗🤗

heart touching
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बदनाम तो बहुत हूं जमाने में,
तू बता तेरे सुनने में कौन सा किस्सा आया है ..

ना जाने कितनी ही अनकही बातें साथ ले जाऊंगा,
लोग झूठ कहते रहते है की खाली हाथ चला जाऊँगा !!

और भी बनती लकीरें दर्द की शायद,
शुक्र है तेरा खुदा जो हाथ छोटा सा दिया !!

तेरी खुशियों का हमसफर नहीं मैं,
तेरे दर्द का हमराही हूँ मैं
जो कभी खत्म ना हो
वो मुहब्बत की स्याही हूँ मैं…!!

हम किसी से खुशियां मांगे ये हमें मंजूर नही,
मांगी हुई खुशियों से किसका भला होता है,
जितना अपनी तकदीर में लिखा होता है, वो ज़रूर अदा होता है।

जब लाश आयी मेरी तो सारी दुनियां को हिला दिया…*
*डॉक्टरों को पोस्टमार्टम करने पर दिल ही नहीं मिला

वो अक्सर ज्योतिष को हाथ दिखाकर नसीब पुछा करती थी अपना.
एक बार मुझे हाथ थमा देती तो नसीब बदल जाता पगली का।
🌹🌹

मैंने भी दिल के दरवाजे पर चिपका दी है एक चेतावनी,
फ़ना होने का दम रखना तभी भीतर कदम रखना ।।

बेकरार बहूत हु इश्क़ दूबारा करना हैं
नये जख़्म के लिये पुराना ज़ख्म ताज़ा करना हैं

अभी तो शेर का पहला मतला लिखा हैं
अभी तो पूरी ग़ज़ल लिखना बाक़ी हैंं

heart touching

बढ़ रहे हैं मेरे क़दम तुम्हारी ओर तुम्हे बताना हैं
मुझे हर क़दम हर लम्हा तुम्हारे साथ चलना हैं

आ रही हैं मुश्किलें तो तुम्हें मुझे बताना हैं
सहमे सहमे नही खुले दिल से साथ रहना हैं

मुहब्बत में यही तो एक रास्ता हैं
मुझे तुम्हें हर एक बात बताना हैं

सबसे प्यारा मेरा अपना जुदा हुआ
खुदा जाने वो मुझसे क्यू ख़फा हुआ

फिरता था जिसके नाज़ उठाये हुए
खुदा जाने वो मुझसे नाराज़ क्यू हुआ

उसके जाने से दिल हैं मेरा झुलसा हुआ
वो नही हैं तो शामियाना मेरा ख़ाली हुआ

ये क्या हुआ ये क्यू हुआ ये कैसे हुआ
उसके हिज्र से ख्वाईशों का क़त्ल हुआ

खुद से ही मैं अकेलेपन का आदी हुआ
मेरी तलाश में न निकलो मैं बेगाना हुआ

जिस शख्श के लिये इरफ़ान लिख रहा हैं
उस मुझसे से बिछड़ के इक ज़माना हुआ

इस कड़ी धूप में मुझे खड़ा कर कर के
तू कहा चला गया हैं मुझे तन्हा छोड़ के

थक सा गया हूँ मैं तेरा इंतेज़ार कर के
पाँव अब गल गये हैं यहाँ खड़े हो के

आफ़ताब डूबा चाँद आया रात कर के
तू कहा चला गया शहर में तन्हा छोड़ के

सुकून चैन राहत आँखो का नूर गया
तू क्यू मुझे छोड़ गया वादे कर के

हौसला गया इरादे गये उमंग गयी
जिस दिन तू गया मुझे पसपा कर के

हर तरफ़ तेरी याद हर जगहा तेरी बात”उमर”
मैं ग़ज़ल भी लिखता हूँ तुझे सोच सोच के

मुहब्बत की बात न कर तेरा मेरा झगड़ा हो जायेगा
दोस्त दोस्त का ही दुश्मन हो जायेगा

उस बेवफ़ा की बातें न कर तू मेरे सामने
देख फ़िर मेरी आँखों मे खून उतर जायेगा

सारे रिश्ते नाते तालुकात तोड़ आया हूँ
खुश हैं इन सब से वो डोली में बैठ के जायेगा

सारे चिराग़ बुझा दो मकान के
उसे मेरा घर का दिखे जब वो यहाँ से जायेगा

जख़्म दिल के अब फ़िर से हरे होने लगे हैं
ऐसा लग रहा हैं अब मेरा आशियाना उजड़ जायेगा

ख़ुदा से डरो तुम संगदिलों पर न मरो
नाज़ुक सा दिल हैं उनके हवाले न करो

न रहम करते न करम हैं इल्तिज़ा न करो
वो तुम्हें मार डालेंगे खुद को उनके हवाले न करो

आँखे खुली रखो ख़्वाब न देखा करो
वो बहूत शातिर हैं उनके पीछे जाया न करो

भवरे की तरहा मंडराते न फिरा करो
ये खेल हैं इश्क़ का तुम इश्क़ न करो

तूम भी शायर बन जायेगा इस ‘इरफ़ान’ की तरहा
सुनो ये प्यार इश्क़ मुहब्बत किसी न किया करो

शायर हूँ मुहब्बत का तलबगार नहीं हूँ
तेरी गली से गुजरा हूँ तेरा आशिक़ नहीं हूँ

जवान हूँ पर लज़्ज़त का शौकिन नहीं हूँ
तेरा हुस्न तेरे पास रख मैं दौलतमंद नहीं हूँ

गुजर जाउगा फिज़ाओ की तरहा रास्ते से
मेरा पीछा न किया कर मैं शिकार नहीं हूँ

इबरत ली हैं मैंने पिछले आशिक़ों से
तुझसे मुहब्बत करने को मैं पागल नहीं हूँ

तूने किस तरहा बर्बाद किया उन्हें देखा मैंने
तेरे हुस्न में खो जाउ मैं वो जवान नहीं हूँ

दावे झूठे वफ़ा के कसमें झूठी न खाँ
तेरे झांसे में आ जाउ मैं इंसान नहीं हूँ

या ख़ुदा महफ़ूज रख मुझे इन हसीनाओं से
मैं तेरा आशिक़ हूँ इनका तलबगार नहीं हूँ

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इन हुस्न वालों का कोई भरोसा नहीं इरफ़ान
मैं ईमान वाला हूँ कोई काफ़िर नहीं हूँ

उस से उम्मीद मैंने की ही नहीं
मुहब्बत उसने मुझसे की ही नहीं

चाहता था मैं उसे दिल ओ जान से
लेक़िन उसने तलब मेरी की ही नहीं

वो क्या जाने मुहब्बत की कद्र
उसने कभी मुहब्बत की ही नहीं

मज़हबी बहस मैंने की ही नहीं
फालतू अक्ल मैंने लगायी ही नहीं

वो क्या जाने कद्र-ए-अल्लाह
उसने कभी इबादत की ही नहीं

शिर्क छोड़ एक अल्लाह पर ईमाँ ला
इसमे तेरा मेरा कुछ है ही नहीं

पूछे ग़र कोई इरफ़ान हैं कैसा
तो कह देना वो अब हैं ही नहीं

दिल मेरा जिस के साथ लगता ऐसा मिला नहीं
ईसा के चाहने वाले मिले अल्लाह वाला कोई नहीं

यार मेरा इसी में खोया हुआ गुमराही में सोया हुआ
शायद उसने सज्दा-ए-ख़ुदा क़भी किया नहीं

शैतान ने उसे बहुत बहकाया ख़्वाब सुनहरे दिखाया
उसे हक़ीक़त से वा-बस्ता करने वाला कोई मिला नहीं

वाह क्या राह दिखाई शैतान ने भी उसे
ला ईसा को खड़ा कर दिया ख़ुदा उसे दिखा नहीं

गुस्से से लाल उठ के जा रहा हैं वो
क़ुरआन उसे सुनाई लेक़िन हिदायत उसे मिली नहीं

कूचा-ए-ज़ाना तूम उधर नहीं जाना
बहोत ख़राब हैं ज़माना तुम कहीं नहीं जाना

रुको रुको मेरी बात तो सुनो
यही हैं घर अपना यहाँ से तुम कहीं नहीं जाना

अग़र तुम्हें कही जाना हो मेरे ही साथ जाना
वादा करो मुझसे तुम अकेले कहीं नहीं जाना

चाँद ख़ुद आयेगा तुम्हें देखने यहाँ
तुम उसे देखने कहीं नहीं जाना

यू ही नही होती किसी से इतनी मुहब्बत
दिल गिरवी रखा हैं तुम्हारे पास तुम कहीं नहीं जाना

इरफ़ान के ला-इलाज़ मर्ज़ की दवा तुम हो
तुम्हें मेरी कसम हैं तुम मुझे छोड़कर कहीं नहीं जाना

कितने कमज़ोर हो तुम पता लगता हैं
मैं क़रीब आऊँ तो तुम्हें बुरा लगता हैं

कलम में मैंने दर्द ग़म सज़ा के रखे हैं
हादसे भुलाने में बहोत वक़्त लगता हैं

आप आये हो यहाँ मेरा दिल दुखाने को
जो भी हमें हमें आपका आना अच्छा लगता हैं

नज़र से नज़र मेरी मिलते तो नहीं हो
मैं किसी औऱ को देखूं तो बुरा लगता हैं

बड़े वफ़ादार बन गये हो इन दिनों आप
दिल में क्या फ़िर से वफ़ा का फूल खिला हैं

यू तो ग़म-ए-दिल दुनियां से छुपाता हूँ
लेक़िन मैं ख़ुद कितना कमज़ोर हूँ मेरी आँखों से पता लगता हैं

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क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़
जान का रोग है बला है इश्क़

इश्क़ ही इश्क़ है जहाँ देखो
सारे आलम में भर रहा है इश्क़

इश्क़ है तर्ज़ ओ तौर इश्क़ के तईं
कहीं बंदा कहीं ख़ुदा है इश्क़

इश्क़ मा’शूक़ इश्क़ आशिक़ है
या’नी अपना ही मुब्तला है इश्क़

गर परस्तिश ख़ुदा की साबित की
किसू सूरत में हो भला है इश्क़

दिलकश ऐसा कहाँ है दुश्मन-ए-जाँ
मुद्दई है प मुद्दआ है इश्क़

है हमारे भी तौर का आशिक़
जिस किसी को कहीं हुआ है इश्क़

कोई ख़्वाहाँ नहीं मोहब्बत का
तू कहे जिंस-ए-ना-रवा है इश्क़

‘मीर’-जी ज़र्द होते जाते हो
क्या कहीं तुम ने भी किया है इश्क़

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है
बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है

उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से
तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिए बनाया है

कहाँ से आई ये ख़ुशबू ये घर की ख़ुशबू है
इस अजनबी के अँधेरे में कौन आया है

महक रही है ज़मीं चाँदनी के फूलों से
ख़ुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है

उसे किसी की मोहब्बत का ए’तिबार नहीं
उसे ज़माने ने शायद बहुत सताया है

तमाम उम्र मिरा दिल उसी धुएँ में घुटा
वो इक चराग़ था मैं ने उसे बुझाया है

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है

ये किस का तसव्वुर है ये किस का फ़साना है
जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है

दिल संग-ए-मलामत का हर-चंद निशाना है
दिल फिर भी मिरा दिल है दिल ही तो ज़माना है

हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है
रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है

वो और वफ़ा-दुश्मन मानेंगे न माना है
सब दिल की शरारत है आँखों का बहाना है

शाइ’र हूँ मैं शाइ’र हूँ मेरा ही ज़माना है
फ़ितरत मिरा आईना क़ुदरत मिरा शाना है

जो उन पे गुज़रती है किस ने उसे जाना है
अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है
हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है

आग़ाज़-ए-मोहब्बत है आना है न जाना है
अश्कों की हुकूमत है आहों का ज़माना है

आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं
नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है

हम दर्द-ब-दिल नालाँ वो दस्त-ब-दिल हैराँ
ऐ इश्क़ तो क्या ज़ालिम तेरा ही ज़माना है

heart touching
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या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से
कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है

ऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा हाँ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है

थोड़ी सी इजाज़त भी ऐ बज़्म-गह-ए-हस्ती
आ निकले हैं दम-भर को रोना है रुलाना है

ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है

ख़ुद हुस्न-ओ-शबाब उन का क्या कम है रक़ीब अपना
जब देखिए अब वो हैं आईना है शाना है

तस्वीर के दो रुख़ हैं जाँ और ग़म-ए-जानाँ
इक नक़्श छुपाना है इक नक़्श दिखाना है

ये हुस्न-ओ-जमाल उन का ये इश्क़-ओ-शबाब अपना
जीने की तमन्ना है मरने का ज़माना है

मुझ को इसी धुन में है हर लहज़ा बसर करना
अब आए वो अब आए लाज़िम उन्हें आना है

ख़ुद्दारी-ओ-महरूमी महरूमी-ओ-ख़ुद्दारी
अब दिल को ख़ुदा रक्खे अब दिल का ज़माना है

अश्कों के तबस्सुम में आहों के तरन्नुम में
मा’सूम मोहब्बत का मा’सूम फ़साना है

आँसू तो बहुत से हैं आँखों में ‘जिगर’ लेकिन
बंध जाए सो मोती है रह जाए सो दाना है

मन में उतरना
और
मन से उतरना
केवल आपके व्यवहार
पर निर्भर करता है

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    सुप्रभात 

अपनी धुन में रहता हूँ
मैं भी तेरे जैसा हूँ

ओ पिछली रुत के साथी
अब के बरस मैं तन्हा हूँ

तेरी गली में सारा दिन
दुख के कंकर चुनता हूँ

मुझ से आँख मिलाए कौन
मैं तेरा आईना हूँ

मेरा दिया जलाए कौन
मैं तिरा ख़ाली कमरा हूँ

तेरे सिवा मुझे पहने कौन
मैं तिरे तन का कपड़ा हूँ

तू जीवन की भरी गली
मैं जंगल का रस्ता हूँ

आती रुत मुझे रोएगी
जाती रुत का झोंका हूँ

अपनी लहर है अपना रोग
दरिया हूँ और प्यासा हूँ

नासमझ हूं साहब,
शब्दों की मिट्टी से महफ़िल सजाता हूँ..!!
किसी को बेकार,
किसी को लाजवाब नज़र आता हूं..!!

मेरी दुनियां लूट गयी मैं देखता रहा
घर मेरा उजड़ गया मैं तकता रहा

वो मुझसे बिछड़कर दूर जाता रहा
मैं बेबसी से बस उसे देखता रहा

वो अपनी यादें मेरे पास छोड़ के चला
मैं तो बस उसे आवाज़ देता रहा

उसके साथ सारी खुशियाँ चली गयी मेरी
मेरे ओठो पर बस उसका नाम रहा

दर्द ग़म तक़लीफ़ कुछ इस तरहा आ के मिले
आँखो में आँसू दिल मे दर्द के सिवा कुछ न रहा

गूँजती हैं उसकी आवाज़ कानों में रात को
ख़्वाब जो देखता हूँ टूट जाते हैं रात को

वो हादसा आ जाता हैं आँखो में रात को
पुकार पुकार के उसे थक जाता हूँ रात को

दिन-ओ-रात गफ़्तल में गुजरी जागा रात को
चाँद चाँदनी के साथ घूम रहा था रात को

इक पसपा शख्श को मिलने आये हो तुम
वो भी रात को

दर्द ग़म तक़लीफ़ दुःख इतने मिले हैं
नींद आँखो से गुम हुई है रात को

heart touching

मैं बड़ा ख़ुश हूँ मुझे नाराज़ न कर
मेरे हमनवा सोच समझ कर बात कर

इतना फ़रेबी इतना बेवफ़ा तू पहले न था
तेरा यक़ी किया था तुझे रक़ीब कर

साक़ी मेरे सब्र का यू न इम्तिहाँ ले
मैं चला जाऊँगा गुज़रे कल में लौट कर

जानेजा तेरी ज़िन्दगी ख़ैरियत से गुज़रे
तू मेरी ज़िंदगी का इतना ख़याल न कर

अब निकल चुका हूँ बच के तेरी हद्द से
दरिया जैसे बहता हों पहाड़ो को चीर कर

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हवा तेज़ चल ज़िन्दगी के वरक पलट दे
दिखने लगा उसका चहेरा धुँध दूर कर दे

यही वक़्त हैं की तू उसकी जुल्फ़े खोल दे
कही फ़िर से वो घर को ना चल दे

उसकी तड़प ही मुझे यहाँ तक लायी हैं
कह दो तुम उस से वो मुझे रक़ीब कह दे

तेज़ दौड़ो उसे जाने न दो घर के अंदर
गिरफ़्त मजूबत कर उसे मेरे क़रीब कर दे

इसलिये तो हम आये हैं तेरे साथ चल के
कही उसका दीदार करना हम न छोड़ दे

मेरी दास्ताँ मुझे ही सुना रहे हो
अच्छा तुम मेरी कहानी लिख रहे हो

कभी रो कर कभी मुस्कुराकर लिख रहे हो
अच्छा तुम मेरे ख़ुशी दर्द के फसाने लिख रहे हो

बड़ी तड़प बहोत बेचैनी से लिख रहे हो
अच्छा तुम मुझे याद कर कर के लिख रहे हो

बड़े ही सुकू आराम सम्भल के लिख रहे हो
अच्छा तुम मेरी बेबसी बेक़सी लिख रहे हो

ना जाने क्या खो गया है मोहब्बत मे…
बार बार खुद में ही ढूँढा करती हूँ मैं…

इश्क़ का पन्ना तुम्हे बारीकी से समझायेंगे
आओ कभी हमारे शहर तुम्हे अपने हाथों से चाय पिलाएंगे🙈

heart touching

कोई शिक़ायत नहीं रही तेरी बेरुख़ी से अब हमको
मसरूफ़ तुम भी अच्छे हो, तन्हा हम भी अच्छे हैं !

सिर्फ तुम्हारे सामने ही खुद को कमज़ोर पाते है।
वरना जो हमारा दिल जलाते है हम उनका शहर जलाते है

तस्वीर में साथ होना और
तकलीफ में साथ होने में बहुत फर्क होता है !

बड़ी मुद्दतो से बिछड़ा हूँ मैं खुद से,अब
बड़ी शिद्दत से चाहत है खुद को पाने की!

हर किसी बात का जवाब नहीं होता हर जाम इश्क में ख़राब नहीं होता यूँ तो झूम लेते है नशे में रहने वाले मगर हर नशे का नाम शराब नहीं होता

बदनाम तो बहुत हूं जमाने में,
तू बता तेरे सुनने में कौन सा किस्सा आया है ..

ये तो आजकल का रिवाज है साहब,
कि जब लोगों का मन भर जाता है तब
बातों का सिलसिला भी ख़तम हो जाता है !!

मुझको क्या हक , मैं किसी को मतलबी कहूँ । मै खुद ही ख़ुदा को मुसीबत में याद करता हूं.

ख्वाहिश ये नहीं थी कि तुम टूट कर चाहो हमें….,
ख्वाहिश बस इतनी है कि कभी टूटने न देना हमें….!

कितना और बदलूँ ख़ुद को जीने के लिए, ऐ ज़िन्दगी ;
थोड़ा सा तो मुझको, मुझमें बाक़ी रहने दे!

रात भर जागने का आदी हो गया हूँ
वो आया ही नही मैं रोने का आदी हो गया हूँ

उसके आने से लबों पर आ गयी थी मुस्कान
उसकी जुदाई में तड़पने का आदी हो गया हूँ

हाय ये क्या खेल खेला ज़िन्दगी ने हमारे साथ
अब मैं रात दिन रोने का आदी हो गया हूँ

वो मेरे दिल का चैन वो मेरा शेर उसके इंतेज़ार में बैठा हूँ आँखे बिछाये मैं
वो न आया मेरे पास मैं उसका रास्ता तकने का आदी हो गया हूँ

इस दिल को अब कहीं करार नही आता
अब वो मेरे घर नही आता
अब मैं दर-बदर घूमने का आदी हो गया हूँ

इरफ़ान की ज़िंदगी अब यू ही कटेगी
अब मैं ग़मगीन रहने का आदी हो गया हूँ

heart touching

मुहब्ब्त कर बैठा नादाँ हैं दिल बेचारा
ख़ता सबसे होती हैं बिगड़ो न ख़ुदारा

धड़कने यू न रोको मर जायेगा बेचारा
सीने पर पत्थर न रखो दब जायेगा बेचारा

जज़्बाती हैं फ़िसल गया हैं बेचारा
तुम उसे समझाओ इश्क़ न करे दोबारा

दरबदर की ठोकरे खा रहा हैं बेचारा
उसे संभालो कहीं मर न जाये बेचारा

गुज़रे हैं जो उसकी गली से हम
ऐसा लगा पुल सीरत पर चले हैं हम

गर्म हवा का झोंका आया
तो ऐसा लगा के जहन्नम के आग में लिपटे हैं हम

heart touching
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बड़ा तवील रास्ता हैं उस गली का
गुज़रे तो ऐसा लगा महशर में खड़े हैं हम

वो पल भी किसी क़यामत से कम नही था
जिस पल उसकी गली से गुज़रे हैं हम

फ़िर उसकी गली से नही गुज़रे हम
ऐसा लगा जहन्नम में पड़े हैं हम

उसके मकान की रोशनी ने जलाकर राख दिया
ऐसा लगा जैसे तंदूर पे बैठे हैं हम

हयात-ए-ज़िन्दगी में कम पढ़े जायेंगे
मेरे शेर मेरे मरने के बाद पढ़े जायेंगे

ज़िन्दा हूँ जब तक वो नही आयेंगे
मेरे मरने के बाद ज़नाज़े में आयेंगे

यू तो मुझसे क़भी मिलने नहीं आयेंगे
लेक़िन वो झगड़ा करने जरूर आयेंगे

यू तो ख़ैर ख़ैरियत पूछने नहीं आयेंगे
लेक़िन मरकद फ़ातेहा पढ़ने आयेंगे

फ़ातेहा पढ़कर वो घर लौट जायेंगे
हमें भुलाकर वो आराम से सोजायेंगे

जाफ़रानी अब वफ़ादार हो गये
मुनाफ़िक़ अब ईमानवाले हो गये

ईमानदार अब चोर हो गये
चोर अब ईमानदार हो गये

खून से सींचने वाले अब गद्दार हो गये
माफ़ी मांगने वाले अब जाबाज़ हो गये

झूठे अब यहाँ सच्चे हो गये
सच्चे अब यहाँ झूठे हो गये

हक़्क़दार अब यहाँ बे-दख़ल हो गये
बे-दख़ल सब यहाँ हक़्क़दार हो गये

किस किस का यहाँ ऐतबार करें इरफ़ान
झूठे सच्चे सब यहाँ एक जैसे हो गये

मेरी चाहतों की शाम उस दिन हसीन हो जाये
मैं उन्हे मांगूं……. और हर तरफ अामीन-अामीन हो जाये…….

सोचा नहीं था के जिन्दगी मे भी ऐसे फसाने होंगे*
रोना भी जरूरी होगा और आँसु भी छुपाने होंगे*

heart touching

इतना न खोलो मुझे मे खुलता चला जाऊंगा
तुम पढ़ते रह जाओगे..
मे अंतहीन किताब बन जाऊंगा 📚

तुमको पाया तो जाना ~ तन्हाई भी खूबसूरत होती है,
खुद को तुझमें खो कर ~ खुद को पाना अच्छा लगता है..!!

बेवफाओं में रहकर बेवफ़ा हो गयी हैं तू
मेरे दुश्मनों के साथ मिल क्यू गयी हैं तू

पाक-दामन थी जब तक मेरे साथ थी तू
मुझे छोड़कर अब गुनाहगार हो गयी हैं तू

ऐन मुमकिन हैं अब मेरा क़त्ल करेंगी तू
मेरी शोहरत से अब बेजार हो गयी हैं तू

रौनक थी तेरे चहेरे पर मेरी मुहब्बत से
मुझे छोड़कर बे-रौनक हो गयी हैं तू

आँखो में आँखे डालकर बात कर तू
यू लेकर अंगड़ाइयां मुझे माइल न कर तू

तेरे बारे में एक ख़बर फ़ैली हैं शहर में
सुना हैं दौतल की तलबगार हो गयी हैं तू

तुम चहेरे से बीमार लगतें हो
इश्क़ में धोका खायें हुए लगते हो

सुर्ख़ आँखे बाल बिखरे हुए
मुझे तुम खानाबदोश लगते हो

शहर में अज़नबी लगतें हो
किसी की तलाश में आयें हुए लगते हो

ज़िंदगी से दरबदर हुए लगतें हो
टूटा फूटे बिखरे हुए लगतें हो

अपने आप से बेगाने हुए लगते हो
ज़िन्दगी से छुट्टी लिये हुए लगते हो

अच्छा हुआ तेरा नशा उतर गया
अच्छा हुआ मन्नत का धागा उतर गया

मुतमइन हैं वो मुझे छोड़कर
मैं भी ख़ुश हू कर्ज़ा मेरा उतर गया

रुख्सत हो रहा हैं बड़ा ख़ुश भी हैं
अच्छा हुआ वो मेरे दिल से उतर गया

खुशहाल ज़िन्दगी निज़ात-ए-परेशानी
अच्छा हुआ वो मेरी नज़रों से उतर गया

अल्लाह की मुहब्बत उसकी पनाह में आया गया
अच्छा हुआ मैं दीनदारी में उतर गया

काफिराना ज़िन्दगी अब तक गुजरी
अच्छा हुआ इमान दिल मे उतर गया

देख मैं अब ज़िन्दा हूँ तेरे बिना
कहता था नही रह पाऊँगा तेरे बिना

बेवफ़ाई की तिज़ारत करते हो धोखा
तुम सबको देतो हो
तुमने सबकुछ खो दिया अब मेरे बिना

बरसों मेरे साथ रहा फ़िर दौलत के पीछे चला गया
देख अब मैं अमीर बन गया हूँ तेरे बिना

देख ज़िन्दगी का कोई भरोसा नही ये तो गुबार हैं
सुन लौट आ नही तो मर जायेगा मेरे बिना

दिलचस्पी अब हैं मुहब्बत दिल के कोने
में कही अब भी हैं
मैं तुझे माफ़ कर दूगा सज़ा दिये बिना

heart touching

जुदा होकर तुझसे मैं ख़ुश रहता हूँ
दूर होकर तुझसे मैं शादाब रहता हूँ

अँधेरे औऱ उजाले की कहानी हैं
तू जहाँ रहता मैं वहाँ नहीं रहता हूँ

मुक्कदर में लिखा कर लाये हैं हम
तुझसे दूर हु मैं तो अच्छा रहता हूँ

जानता हूँ तू किसी दिन आयेगा जद में
इसी वजहा से मैं बच बच के रहता हूँ

भरे पड़े हैं बाज़ार गुलाबो से यहाँ
जानता हूँ तू आयेगा लेने को
इसलिए मैं अब बाज़ार में नहीं रहता हूँ

देखा था मैंने तू किस तरहा गया ग़ैर के पीछे
इसीलिए अब मैं तेरे पीछे नहीं रहता हूँ

दर्द तक़लीफ़ ग़म सब तेरे करम हैं
इसलिए अब मैं तेरे साथ नहीं रहता हूँ

बड़ी देर बाद समझ आया तेरा खेल मुझे
इसलिए अब मैं दूसरे शहर में रहता हूँ

मैं बेवफ़ा में वफ़ा तलाश करता हूँ
मैं दलदल में रास्ता तलाश करता हूँ

मैंने इक बात से उसे पहचान लिया था
लेक़िन मैं अब भी सबूत तलाश करता हूँ

मुझे यक़ीन हैं अपने तजुर्बे पर
लेक़िन मैं गूढ़ के लिए मलीदा तलाश करता हूँ

दिल को समझाना मुहाल हैं मेरे
इसलिये मैं बहाने तलाश करता हूँ

दर्द ग़म तक़लीफ़ से जंग करता हूँ
मैं बुझे हुए दिये में लव तलाश करता हूँ

हो गयी वो बेवफ़ा उसका कोई ग़म नही
मैं अब ग़म में भी ख़ुशी तलाश करता हूँ

बहोत ख़ुश हैं वो सो कर गैर की बाहों में
मैं अब सहारे के लिये किसी की तलाश नही करता हूँ

अकेले में मिलों तो बताऊंगा
क़िस्मत सुलझने दो बताऊंगा

आने की ख़बर मेरी किसी को न दो
मैं ख़ुद ऐलान कर के बताऊंगा

वक़्त ख़ुद को दोहरा रहा हैं
रूठ रही हैं चम्पा कली को भी बताऊंगा

क्यू हैं मुक्कदर में मेरी ये चीज़े
मुझे सवरने दो मैं ख़ुद बताऊंगा

माल दौलत ऐश आराम क्या हैं
अपने दिल पर हाथ रखो मैं हवेली बताऊंगा

मेरी ग़ीबत इधर उधर न किया करो
हमराज बने रहो मैं सब बताऊंगा

दोस्ती की तलब दिल मे ले के आते हो
तन्हा मिलो कही फ़िर मैं बताऊंगा

मेरे जख्मों को यू ना ताज़ा करो तुम
वरना शमशीर मयाँ से निकाल कर बताऊंगा

तुम महज कल्पना हो
मेरी दुनिया की,
तुम्हें खो कर भी
न खोना ,
तुम्हारी हो कर भी
न होना,
हमेशा साये सा रहते हो
मेरे साथ
फिर भी कुछ नहीं है
मेरे और तुम्हारे दरमियान।💔

ये इश्क़ का जुआ हम भी खेल चुके है साहब!

रानी किसी और की हुई और ज़ोकर हम बन गये!!!!
कितनी कोशिश करते है तुम्हे छिपा कर रखने की सबसे,..!!
पर हमारी मुस्कराहट में लोग तुम्हे ढूंढ ही लेते है हंमेशा…!!!

मैं पेड़ हूँ , गिरते हैं हर रोज पत्ते मेरे..!
फिर भी कभी हवाओँ से नहीं बिगड़े रिश्ते मेरे…!!

तुम मेरे पास थे
हो
और रहोगी..

ख़ुदा का शुक्र है
यादों की कोई उम्र नहीं होती..
💔💔😒💔💔

heart touching

मरहम जख़्म को भर देता हैं
नया पुराने को भुला देता हैं

जरूर उसकी मुझसे दुश्मनी होंगी
जो प्यार के बदले तक़लीफ़ देता हैं

नसीब नही हुए वस्ल के पल
वो तो हमें इंतेज़ार की घड़ियाँ देता हैं

मुहब्बत में हम क़ीमती ठहरे
वो जब चाहें हमे बेच देता हैं

वो अपना कर्ज़ा उतार रहा हैं
वो जब चाहें हमे खरीद लेता हैं

अल्फ़ाज़ किसी के नहीं होते हैं
जो कहते हो हमारे हैं हमारे हैं

ग़ज़ले शायरियां हम भी लिखतें हैं
जो कहते हो हम लिखतें हैं हम लिखतें हैं

धोखा हमनें भी खाया हैं दिल हमारा भी टूटा हैं
जो कहते हो हमारा टूटा हैं हमारा टूटा हैं

बेरुख़ी बेवफ़ाई क्या होती हैं हमसे पूछो
तुम्हें कुछ नही पता हैं तुम्हें कुछ नही पता हैं

बहर मतला मक़्ता मिसरा क़ाफ़िया रदीफ़
हमें भी आता हैं
जो कहते हो हमें आता हैं हमें आता हैं

सुनो तुम्हें कुछ नही आता हैं
बस तुम्हें दूसरों के नुक्स निकालना आता हैं

आशिक़ था जो उसका मर गया
बस अब इरफ़ान ज़िन्दा रह गया

तुम्हें क्या बताऊँ उसके बारे में
वो इक दिन मेरे दर से उठकर चला गया

बेवफ़ा हैं वो अपने दौर की
तुम समझ रहे हो वो वफ़ा कर के चला गया

निशां अब भी हैं उसके दिये जख्मों के
वो क़ातिल से हाथ मिला के चला गया

जो मेरे दिल में बस्ता था खुदा की तरहा
वो मेरे दिल को आग लगा के चला गया

उम्मीद कर रहा था मैं उस से वफ़ा की
वो मेरे साथ जफ़ा कर के चला गया

लैला ने जो मारा था पत्थर मजनू को
वही पत्थर वो मुझे मार के चला गया

ज़रूरी तो नहीं के अम्मी साथ आये
तुम अकेले बाज़ार क्यू नहीं आये

दबे दबे पांव चुपके चुपके क्यू नहीं आये
तुम अपनी बहन को साथ लेकर क्यू आये

दूर से देख रहे हो बहाने कर के देख रहे हो
तुम अपने भाई को साथ लेकर क्यू आये

सोच रहा था आज तुम अकेले आओगे
लेक़िन आज तुम अपने अब्बा को लेकर क्यू आये

क्यू न मैं नाराज़ रहू क्यू न गुस्सा करू
तुम मेरे दिल के जैसा कर के क्यू नहीं आये

शक़्ल देख कर मुहब्बत क्यू करें
हसीं होगा वो जो हम से वफ़ा करें

राह चलते हुए ये ख़याल आया
आज हम उसके लिये क्या करें

मैं जिसके इंतेज़ार में यहाँ आया हूँ
मैं चाहता हूँ वो भी मेरा इंतेज़ार करें

ये वफ़ा कहीं जफ़ा में न बदल जाये
इसलिए हम थोड़ा एतियाद करें

मैं सोचता हूँ वो शख्श मेरा हैं
मैं चाहता हूँ वो भी यहीं करें

ये शाइरी तो शौक़ हैं इरफ़ान का
इरफ़ान चाहता हैं वो ये शौक़ पसंद करें

heart touching
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चल बता तूने ये जाल क्यू डाला था
जब दिल नहीं था इश्क़ क्यू किया था

जानता हूँ तुम ख़ानदानी बेवफ़ा हों
लेक़िन तूमने मेरे खेल क्यू खेला था

मजनूं नहीं जानता था दुनियां वालो को
चल तू बता तूने ये क्यू किया था

भरी महफ़िल में तेरा नाम ले लूगा
तू मुझे बता तू छोड़कर क्यू गया था

जी करता हैं तेरा गला दबा दू
जा तू तुझे मुआफ़ किया तू मेरा इश्क़ था

अल्लाह तू बता दे अपना करिश्मा इसको
ये कह रहा था अल्लाह कहा थाा

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मंजिल को क्या खबर कि
सफर क्या क्या छीन रहा है मुझसे।

कौन कहता है नेचर और
सिग्नेचर कभी नही बदलतें हैं…
अगर हाथ पर चोट लगे
तो सिग्नेचर बदल जाता है…
और चोट अगर दिल पर हो
तो नेचर बदल जाता है…

मुझको अंदाजा हो गया था इस बात का,
मोहब्बत बेपनाह हो गयी है अब बिछड़ने वाला हूँ!

जाते-जाते उसके आखिरी अल्फाज़
यही थे….!
जी सको तो जी लेना मर जाओ तो
बेहतर है…🥺

महफ़िल में तेरा नाम लेते हैं
अब हम होश में नही रहतीं हैं

रोज़ एक नया ख़्वाब देखते हैं
अब हम यू ही ज़िंदगी जीते हैं

देखते हैं रास्ता तेरा रोज़ हम
आती हैं हवा तो हम सहम जाते हैं

रंग भरते हैं हम तसव्वुर में
बैठे बैठे हम तेरी तस्वीर बना लेते हैं

दे ही देते हैं अब हम दिल को तस्सली
तू खुश रहे हम यही दुआ करते हैं

बेताब कर देगी मुझे उनकी वो जादू भरी नज़र,
जब हम उनके देखने की अदा देखते ही रह जायेंगे.
❤❤

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डर सा बैठ गया दिल में रात होते ही
बदल गया सब कुछ उसके बदलतें ही

दर-ओ-दीवार मेरा साया सवाल करने लगा हैं
मकान में चिराग़ जलाते ही

इक अजीब सी खुशबू फिज़ाओ में हैं
तेरा ख़याल मेरे ज़हन में आते ही

तू दोस्त था तू मेरा हमसाया था
मैं बहुत रोया तेरे जुदा होते ही

दिल की आग ने लफ़्ज़ों को फ़िर
से ज़िन्दा कर दिया
हुरूफ़ सब एक हुए जख़्म ताज़ा होते ही

मैं बेकरार था ताजा साँस लेने को
रूह ताज़ा हुई तेरी याद आते ही

कर के काजल से दोस्ती एक रोज़…….
मैं भी उतरूँगा तेरी आँखों में……..

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