Sad Shayari Latest शायरी in Hindi Status

Your most welcome to our blog updatesnr.com. You can see in this page sad shayari. Two lines sad shayari. Whatever the reasons, love, life or friends, sometimes we feel very sad. Our emotions want to come out of our heart. To share your sadness, we have a finest collection of Sad Shayari, Sad SMS and Whatsapp Sad Status in Hindi. And share anywhere like WhatsApp, Facebook, Instagram anywhere.

Sad Shayari – Latest शायरी in Hindi Status with images WhatsApp Instagram status

मैं शायद पिछले जनम उसकी कर्जदार थी,
इसीलिए वो आया, यादे दी और चला गया।

ये आईने तुम्हें जो कम पसंद करते हैं,
इन्हें मालूम हैं कि तुम्हें हम पसंद करते हैं।

गुनाह तो हो गया है दोस्तों, अब तो बस सजा काट रहे हैं ,

मोहब्बत से मिले गम को, हम अल्फाजों में बांट रहे हैं…!!

Sad Shayari Latest

ए दोस्त सुन अब मुहब्बत दोबारा नही होगी
क़यामत हम पर आ चुकी है,अब क़यामत नही आयेगी

जिसे सब कुछ बताया था,जिसे अपना माना था
बडा बेदर्द निकला वो अब मुहब्बत नही होगी

बेमतलब है अब मेरा ज़िन्दा रहना,
मुझे साँसों की जरूरत अब नही

उसके इश्क़ में डूब कर सबकुछ भूला था,
खुदा तू मुझे माफ़ करना,अब मुहब्बत नही होगी

मज़हब के ठेकेदारों ने हमे जुदा कर दिया,
कही मस्ज़िद,कही मंदिर,कही गिरजा बना दिया

क्या बया करू मैं ज़माने की हक़ीक़त को,
सच गर कहूगा तो ज़िन्दा न रहूगा

मैं खामोश हो गया,कुछ कहते कहते
दिल की बात दिल मे रह गयी,कहते कहते

वो अब खुदगर्ज़ हो चुका है,मुझे अपना कहते कहते
रात हम रो रो कर सो गए,कहानी तेरी सुनाते सुनाते

ख़बर नही है अब उसको मेरी,वो कहता
था तुम मेरे हो तुम मेरे हो
वो आयेगा शायद हमारे जाने के बाद,
हम थक गए उसके इंतेज़ार करते करते

मैं खामोश हो गया,कुछ कहते कहते
दिल की बात दिल मे रह गयी,कहते कहते

मैं खामोश हो गया,कुछ कहते कहते
दिल की बात दिल मे रह गयी,कहते कहते

वो अब खुदगर्ज़ हो चुका है,मुझे अपना कहते कहते
रात हम रो रो कर सो गए,कहानी तेरी सुनाते सुनाते

ख़बर नही है अब उसको मेरी,वो कहता
था तुम मेरे हो तुम मेरे हो
वो आयेगा शायद हमारे जाने के बाद,
हम थक गए उसका इंतेज़ार करते करते

मैं खामोश हो गया,कुछ कहते कहते
दिल की बात दिल मे रह गयी,कहते कहते

दास्तान-ए-मुहब्बत कुछ यू रही,
वो रूठे ऐसे के मनाए न गए

सबकुछ भूल गए हम वक़्त के साथ,
बस एक वो है जो भुलाई न गयी

हम पर किसी का जोर न चला,
उसने जो किया किसी ने न किया

क्या मुहब्बत करोगे तुम मेरी तरहा,
उनसे न हुई तुमसे क्या होगी

हक़्क़ है उस पर अब किसी गैर का,
जो कहता था हक़्क़ सिर्फ तेरा है

Sad Shayari Latest

नजा का आलम जब तारी हुआ,
तब जा कर तूने मुझे आवाज़ दी
जाना तूने आने में बड़ी देर की

तुझे देखकर दिल खुश हुआ मेरा,
लेकिन जा रहा हु मै तन्हा जाना

आँखो के सामने अँधेरे आ रहे है,
तेरा चहेरा ढूढ़ला नज़र आ रहा है

करीब का के तेरा माथा चूम लू,
जाते जाते तुझे कुछ तो दे दू

sad shayari in hindi

कह दे के जो है तेरे दिल मे जाना,
आखरी वक़्त है खामोश न रह

तू यू क्यू चुप चाप खड़ा है मेरे पास,
तेरी आवाज़ सुननी है आखरी बार मुझे

शायद अल्फ़ाज़ नही है तेरे पास आज,
मेरा हाल देख आवाज दब गयी है तेरी

काश तू न आता आज मेरे पास जाना,
तूने आकर मेरी तक़लीफ़ और बढ़ा दी

तू यू क्यू चुप चाप खड़ा है मेरे पास,
तेरी आवाज़ सुननी है आखरी बार मुझे

कुछ देर के लिए आते चले जाते
वो दिल की धड़कन बढ़ा जाते

दिल करता उन्हें रोक लू,
वो जाते तो जल्दी आते नही

मेरी आँखें तकती रहती रास्ता उनका,
वो बिन बताए आते और चले जाते

ये क्या मौहाल बना रखा उन्होंने,
तक़लीफ़ बढ़ाते और चले जाते

उनके इश्क़ ने मजबूर कर रखा,
हम तो उनका इंतेज़ार करते रहते

वो नही समझते हमारी मुहब्बत,
वो नजरअंदाज करके चले जाते

मुझे उसकी मुहब्बत ने मारा,
दिल मेरा उसने तोड़ा

बर्बादी का सबब न पूछो मेरी,
नाम उसका पहेले आयेगा

तीर चलाये हम पर नफरतों के,
तीरअंदाज वही था

क्या बताये शहर से निकाले गए,
वफ़ा जिस से की पहल उसने की

हमे उसकी बेरुख़ी ने मारा,
दिल मेरा उसने तोड़ा

उसने गिनवा दिए मेरे सारे ज़ुल्म…
मग़र उसने मेरे इश्क़ का हिसाब ना दिया

मेरी बस इतनी सी ख्वाहिश है कि,
तेरी कोई ख्वाहिश कभी अधूरी ना रहे!

आख़िर क्या गुज़री होगी उसके दिल पर,
जब ना-पसंद शख़्स ने उसका घुंघट उठाया होगा…!!!

मुहब्बत करना छोड़ दी हमने,
आवारा हो गए शराफ़त छोड़ दी
बुलंदी पर पहुचे,निचे क्यू देखे
वो न मिला,उम्मीद छोड़ दी

जो भी हो हशर हमारा देख लेंगे,
पीछे मुड़कर देखना छोड़ दिया
उस से न मिलने की कसम खाई,
वो मिलेगा तो मुँह मुड़ लेगे
करे क्या शिकायत उनसे हम,
गीले शिकवे छोड़ दिये

चाँद में चहेरा देखा था उसका,
इस कदर मुहब्बत की थी के
अब मुहब्बत करना ही छोड़ दी

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है
हम हैं मुश्ताक़ और वो बे-ज़ार
या इलाही ये माजरा क्या है
मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ
काश पूछो कि मुद्दआ’ क्या है
जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद
फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है
ये परी-चेहरा लोग कैसे हैं
ग़म्ज़ा ओ इश्वा ओ अदा क्या है
शिकन-ए-ज़ुल्फ़-ए-अंबरीं क्यूँ है
निगह-ए-चश्म-ए-सुरमा सा क्या है
सब्ज़ा ओ गुल कहाँ से आए हैं
अब्र क्या चीज़ है हवा क्या है
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है
हाँ भला कर तिरा भला होगा
और दरवेश की सदा क्या है
जान तुम पर निसार करता हूँ
मैं नहीं जानता दुआ क्या है
मैं ने माना कि कुछ नहीं ‘ग़ालिब’
मुफ़्त हाथ आए तो बुरा क्या है
(मिर्झा_ग़ालिब)

Sad Shayari Latest

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता

Sad Shayari Latest for gf

तेरे वा’दे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए’तिबार होता

तिरी नाज़ुकी से जाना कि बँधा था अहद बोदा
कभी तू न तोड़ सकता अगर उस्तुवार होता

कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता

ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता

रग-ए-संग से टपकता वो लहू कि फिर न थमता
जिसे ग़म समझ रहे हो ये अगर शरार होता

ग़म अगरचे जाँ-गुसिल है प कहाँ बचें कि दिल है
ग़म-ए-इश्क़ गर न होता ग़म-ए-रोज़गार होता

कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता

हुए मर के हम जो रुस्वा हुए क्यूँ न ग़र्क़-ए-दरिया
न कभी जनाज़ा उठता न कहीं मज़ार होता

INTERESTING

shayari

उसे कौन देख सकता कि यगाना है वो यकता
जो दुई की बू भी होती तो कहीं दो-चार होता

ये मसाईल-ए-तसव्वुफ़ ये तिरा बयान ‘ग़ालिब’
तुझे हम वली समझते जो न बादा-ख़्वार होता
(मिर्झा ग़ालिब)

हर इक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुमहीं कहो कि ये अन्दाज़े-गुफ़तगू क्या है

न शोले में ये करिशमा न बरक में ये अदा
कोई बतायो कि वो शोखे-तुन्द-ख़ू क्या है

ये रशक है कि वो होता है हमसुख़न तुमसे
वरना ख़ौफ़-ए-बद-आमोज़ीए-अदू क्या है

चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन
हमारी जैब को अब हाजते-रफ़ू क्या है

जला है जिसम जहां, दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख, जुसतजू क्या है

रग़ों में दौड़ने-फिरने के हम नहीं कायल
जब आंख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

वो चीज़ जिसके लिये हमको हो बहशत अज़ीज़
सिवाये वादा-ए-गुलफ़ाम-ए-मुशक बू क्या है

पीयूं शराब अगर ख़ुम भी देख लूं दो-चार
ये शीशा-ओ-कदह-ओ-कूज़ा-ओ-सुबू क्या है

रही न ताकते-गुफ़तार और अगर हो भी
तो किस उम्मीद पे कहये कि आरज़ू क्या है

हुआ है शह का मुसाहब फिरे है इतराता
वगरना शहर में ‘ग़ालिब’ की आबरू क्या है
(मिर्झा ग़ालिब)

Sad Shayari Latest

वफ़ा उनसे जफ़ा हमसे करते हो
जान तुम बडा ज़ुल्म करते हो

मुहब्बत हम उनसे किये जा रहे
बेपनाह
वो देखो हमारी साथ बदसलूकी
किये जा रहे

वक़्त उनका उन्हें कुछ न कहेगे
दौर आयेगा हमारा हम मुहब्बत देगे

दिल आया उन पर हमारा,
हम करे भी तो क्या करे

आँखो से देखे हादसे भुलाये नही जाते
हम कोशिश भी करे तो बेकार जाते

खुदाया ये क्या हुआ हमारे साथ
हमसे तो अब जीया न जाता

हस दे कोई गर तो झिड़क देते
वो बिछड़ा हुआ अब नही आता

जिस जगहा जाये उसकी याद आये
अब शहर-ओ-तफ़री नही होती

Sad Boy:
जिस भोर बहन जन्मी घर में
दादा ने माँ के पुरखो को गालियाँ दी
दादी ने माँ के खानदान को
पिता ने माँ को
औऱ बिलखती माँ ने खुद को
सांझ होते-होते
लपेट लिये गये ईश्वर भी।
फिर भी बहन ने संस्कार सीखे
औऱ मैंने गालियाँ!

*क्या ऐसा नही हो सकता है कि हम सब गालिया देना बंद कर दे।। मेरी इस बात से सहमत हो तो इस पोस्ट को और लोगो तक पहुचायेगा।। क्या पता एक दिन समाज से माँ बहन पर कहने वाली गालिया हमेशा के लिए बंद हो जाए।।
💯💯💯💯💯💗💗💗💗💗

इन्हें भी जानें Audi A4 2021 | Review | Facelift | Price | Specifications

Love shayari

Emotional shayari

Bewafa shayari

इक खंज़र था जो लगा निकल गया
मेरी आवाज़ से शहर गूंज उठा

सोये हुए जाग उठे मुझे देखते रहे
मैं ख़ामोश गलियों से गुज़र गया

ख्वाइशें थी जो ख़ाक हुई मेरी
मैं राख उठाकर चल दिया

सहर फूटी थी सुर्ख़ मंज़र ग़मगीन था
कुछ ही पल में सब बदल गया

अरसे बाद देख उसे दिल खुश हुआ
फ़िर बाद में सब जैसा था वैसा हुआ

Sad Shayari Latest

ज़िक्र उसका बया ग़ज़लों में हुआ,
पराया बन गया जो अपना था

मयख़ाने मे पड़ा हुआ हु ग़मगीन,
इम्तिहाँ क्या दु मै अपना

मंजर कुछ और भी हो सकता था,
काश के वो बन जाता अपना

न मिला वो तो कोई गम नही,
हम उसके रहेगे हमेशा

दर्द दिल का क्यू लिखू ख़ामख़ा,
जख़्म हरे होंगे ख़ामख़ा

मर्ज-ए-इश्क़ मे न दवा मिली न दुआ
न मै ठीक हुआ,न मुझे कुछ हुआ

मजमा न लगाओ शहर वालो का
इक छोटा सा तमाशा हुआ,कुछ न हुआ

हम कहा तुझसे फरियाद कर रहे
उठा ख़ज़र दिल पर चला

कितनी मुहब्बत देख मुझे तुझसे
ज़ख्म खा के भी कुछ न हुआ

ख़बर फैली तूने घाव दिया
देख अब तक शहर मे तमाशा न हुआ

क्या इश्क़ तेरा भी
इसमे मुझे हासिल कुछ न हुआ

जाना जान तुम्हारे हाथों में दी थी
जान देकर भी कोई फायदा न हुआ

तेरे होते हुए रहते है उदास
लोग क्या समझेगे तूने बेवफ़ाई की

मसरूफियत की वजहा से न आता तू
हम भी बहला लेते दिल तेरी यादो के साथ

फासला दिन ब दिन बढ़ता जा रहा
तू पल हर पल लम्हा लम्हा दूर जा रहा

खबर नही हो रही है शायद तुझे मेरी
मै मरता जा रहा हु इस तन्हाई से

रौशनी हो जायेगी तेरी आने से
यू न धकेल अँधेरे की खाई मे मुझे

इतना न बेबर्द,बेफिक्र न बन
मुहब्बत तूने भी की मुझसे

ऐसी बसी चाहत तेरी दिल मे
दिन ओ रात याद करते तुम

Sad Shayari Latest

कभी कभी दिल मे दबे एहसास अल्फाजों के यूं रूप ले लेते है कि वह एक कृति बन जाती है…
नहीं देखा कभी पैदा होते, किसी शायर को,
एहसासों को अल्फाजों में लिखा, तो ग़ालिब बन गये….
मेरे तसव्वुर में भी कुछ खयाल इस कदर आए,
कलम चल पड़ी और हम भी काबिल बन गये

परेशा हो गए उलझी मुहब्बत से
छोड़ देगे सब बे-दिली से हम

मायूसी, उदासी न पूछ तू
वो पेश आता है बेगानो की तरहा

छोड़ देगे उम्मीद तुझसे हम
न करेगे शिकवा,न शिकायत हम

जागेगा दिल अभी वक़्त है
अभी ग़म बहोत है तेरा दिया हुआ

मिल बैठे गर गलती से राह मे हम
पूछ बैठेगे कई सवाल तुझसे हम

हर तरहा के लफ़्ज ज़ुबा मे है
कभी मिठास,कभी कड़वाहट है

दिलो को दिलो से मिला दे
अपनो को पल भर मे पराया कर दे

दबा के क्यू रखी छुरी बगल मे
इरादा-ए-क़त्ल हो तो कर दो

मिठी मिठी बाते न करो तुम
जो बात है सीधी बोल दो तुम

इश्क़ किया कोई सौदा नही
तुम जुदा होना चाहते हो बोल दो

छोटी छोटी बातो को बड़ा न बनाओ
संग अच्छा नही लगता मेरा तो बोल दो

नजरे न चुराओ मुझसे तुम
आँखो मे आँख डाल के जो है वो बोलो

अपनी कोई तस्वीर भेज दो
ऐसा करो तुम ख़त भेज दो

तुम्हारी बाते पढेगे सुकू मिलेगा
ऐसा करो मिठे मिठे अल्फ़ाज़ भेज दो

तेरी मुहब्बत मे हारकर
जा रहा हु शहर छोड़कर

मयकदा खुला चौराहे पे
तुम क्या रूठे
हम दिन ओ रात वही रहे

इक पल की भी फुर्सत न मिली तुम्हे
देखी हमने मुहब्बत तेरी

अब हम तेरे जहनो गुमा से गुम हुए
देखा नही तूने इक बार भी मूड के

ये दर्द ग़म रुक क्यू नही जाता
जो हुआ वो मै भूल क्यू नही पाता

सारी चीजे तो है मेरे मका मे
न जाने मै घर क्यू नही जाता

वो एक ही शख्श है क्या जहाँ मे
जो जुदा है मिल क्यू नही जाता

मै खुद अपने आप मे एक तमाशा हु
करते है जो सब वो मै क्यू नही करता

जो ख़्वाब बरसो पहले देखे थे मैने
वो ख़्वाब मुक्कमल क्यू नही होते

नया इल्जाम लगाओगे क्या,
बिछड़ना है तो झगड़ा करोगे क्या..?

खामोशी से करो तुम रस्म अपनी,
शहर मे तमाशा करोगे क्या…?

बहोत है ये के हम मुहब्बत करते है,
अब तुम वफादारी का ढोंग करोगे क्या..?

प्यार,मुहब्बत, इश्क़,वफ़ा,यकीं
इन अल्फाज़ो का कोई मतलब नही
अब इनके पीछे वक़्त जाया नही करेगे

किया था ज़िन्दगी भर साथ निभाने का वादा
तूने छोड़ा तो अब तेरा इंतेज़ार क्यू होगा.?

जब नही तुझे फिक्र मेरी
तो मै तेरी फिक्र करुगा क्या…?

कहा कहा हो तुम आज भी तुम वही हो क्या
बताओ तुम मुझसे बिछड़कर खुश हो क्या

बड़े जोर से कह कहे लग रहे है
बताओ तुम मुझे भूल गए हो क्या

याद है न तुम्हे मेरे साथ बिताये हुए पल
बताओ तुम मुझे देखकर उदास हो क्या

मुझे तो हर पल तुम्हारी याद आती है
बताओ तुम भी मुझे याद करते हो क्या

मेरी ज़िंदगी मे अब भी कोई नही है
बताओ तुम मेरी ज़िंदगी बनोगे क्या

क्या कहा इश्क़ जानलेवा है
तुम क्या मुझसे पहली बार मिल रहे हो क्या

यहा काली घनेरी रात है
बताओ वहा रोशनी है क्या

मेरी मुहब्बत बेअसर रही शायद
बताओ तुम पर कोई असर हुआ क्या

Sad Shayari Latest

नया लिबाज़ पहन कर जाउ कहा
बिखरे बाल,बढ़ी हुई दाढ़ी बनाउ किस के लिए
वो गाव छोड़ गया अब मै गाव जाउ किस के लिए

जिस राह मे उसका घर था अब वो नही रहता वहा
अब मै उस राह पर जाउ किस के लिए

वो गाव मे था तो बहाने बना बनाकर जाता था
अब मै इतने सारे बहाने बनाउ किसके लिये

इक अरसे से कोई नही आया मेरी ज़िंदगी मे
अब तुम ही बताओ ज़िन्दगी सवारु किस के लिए

★अज्ञात…✍★:
कुछ लोग हमें अपनी ज़िंदगी मे
गुबारा समझ लेते है मौके पर इस्तेमाल
फिर फाड़ देना या फेक देना।
══━━━✥ ❉ ✥━━━══
सुप्रभात

इश्क़ मिलता है ‘क़िस्मत’ वालों को,
मगर क़िस्मत वाले कहाँ “इश्क़” करते हैं !!

ज़हर ज़िन्दगी का पी के हम कई बरस जिये
चार दिन की ज़िंदगी मे हम कई बरस जिये

इख़्तियार हमारा कहा है ज़िन्दगी पर जाना
जो दो चार पल मिले तेरे साथ जी लिये

इस पार से उस पार चली गयी नाव
हम तो बस देखते रह गये

लबो पे नाम लेकर रात तेरा
हम रात भर गुनगुनाते रहे


जुदाई बेवफा

Sad Shayari Latest sad bewafa shayari

तू बेवफ़ा ही सही दिल दुखाने आ जा
तू इक बार फ़िर से जुदा होने को आ जा

मैने तेरी मुहब्बत का भरम पाल रखा
तू कभी तो मुझसे मिलने को आ जा

तक़लीफ़ दर्द गम तू देने को आ जा
रस्म तूने जो निभायी वो फ़िर से निभाने आ जा

किस किस को बताये तू बेवफ़ा है
तू ख़ुद ही बताने को आ जा

इक मुद्दत से रोया नही हु मै जाना
तु मुझे फिर से रुलाने को आ जा

अब भी मुझे है तुझसे उम्मीद बहोत
तू इस बार जलता हुआ चिराग़ बुझाने आ जा

भूलना चाहू तो भुलाया नही जाता
यादो को उसकी मिटा नही पाता

दर्द जो मिला वो बढ़ता जाता
हमे तो खुलकर बताना नही आता

मेरी डूबती हुई कश्ती को सहारा दे दो
जानता हु तुम्हे साथ चलना नही आता

लोग तेरी बेवफ़ाई की वजहा पूछ रहे
हमसे तो कुछ बताया नही जाता

तकाज़ा ज़िन्दगी का है किसे बताये
किस्से कहानी हमे सुनाना नही आता

जख़्म देने की भी हद्द होती है जाना
अब तो हमे तुम्हे रोकना भी नही आता

तुम आओगे हर रात ख़्वाब देखते है
लेकिन तूमसे तो आना भी नही होता

मेरी बातें तुम पर असर नही करती अब
अब तुम्हे दिल चीर के दिखाया नही जाता

रात मे जब सारी दुनिया सोती है
तेरे हिज्र का मारा हमेशा जागता है

Sad Shayari Latest

रफ्ता रफ्ता तेरी याद आती है
फिर धीरे धीरे दिल को छलनी करती है

सोचता हु लिखता हु
तुम नही होते मेरे पास मै याद करता हु

कोई मजनूं कोई दीवाना कहता है
मै शहर दर शहर गली गली घूमता हु

चाँद निकल आता है तारे जगमगाते है
तेरी सूरत मुझे दिखाई देती है

तेरा साथ छूट गया तू मुझसे जुदा हो गया
ख्वाइशें दिल की सैलाब मे डूब गयी

एक न एक दिन ये होना था ये वक़्त आना था
तुम इस बात का ग़म न करो हमेशा खुश रहो

तक़दीर के आगे तदबीर नही चलती
खुदा के आगे किसी की नही चलती

इक तमन्ना हो तो पूरी हो जायेगी
हजारो ख्वाइशें पूरी नही होती

आँखो से दिल मे समा गयी है
तस्वीर किसी की
तस्वीर अब नही मिटती

वो आये न आये दिल को सुकू नही मिलता
कम्बख़त ये अब मेरी बात नही मानता

मुस्तक़बिल मे इक ख़्वाब सजाया था
बिखर गया सब कुछ देखते देखते

हम तन्हाई मे जीने वाले लोग है,
तुम्हारे चाहने न चाहने से फर्क नही पड़ता

इरफ़ान है ये इश्क़ जलता बुझता दिया,
न उठा इसे के हाथ जल जायेगे

मजनूं, हीर, रांझा से पूछ इसके बारे
दुनिया वालो को इसकी ख़बर नही

खून से लिखी गयी है दास्तान इसकी,
तूने पढ़ा नही किस्सा सलीम-अनारकली का

न देखा लैला ने मजनूं का चेहरा कभी,
पत्थरो से मारकर नक्शा बिगाड़ा दिया

ग़र तलबगार है तू इश्क़ का तो न पाल
ख्वाइशें,
हर कदम इम्तिहाँ है,हर कदम मौत

हाथ मलता रह गया मेरे जाने के बाद,
मुहब्बत औऱ बढ़ गयी हिज्र के बाद

वो खुद से ही ख़फा है मेरे जाने के बाद
वो बागबाँ हुए मेरे आने के बाद

रंग दिखा ही दिया मेरी मुहब्बत ने,
उसने मुझे याद किया मेरे जाने के बाद

ग़मो मे डूब चुके थे वो मेरे जाने के बाद
वो सरसब्ज़ हुए मेरे आने के बाद

सोगवारी मे कई दिन गुजारे उसने
कितनी खुश है अब वो मेरे आने के बाद

फ़िर बढ़ रहा जोश-ए-जुनू इश्क़-मुहब्बत का
कही कोई मुझे ग़र्क न कर दे डर रहा हु

मै वो हु जो अपनी तबाही के सबब तलाश कर रहा हु
कसरत-ए-मुहब्बत कही तबाह न कर दे मुझे

चश्म-ए-अश्क़ ख़लिश-ए-दिल जिगर मे चोटे है
उफ़्फ़ मैने ये क्या कर दिया खुद ही खुद को बेताब कर दिया

Sad Shayari Latest

नजरे नीची रख किसी को न देख
महफ़िल मे जाकर आदाब से बैठ

सोज़-ए-फ़ुर्क़त तपिश-ए-ग़म तलाश न कर
आरज़ू इश्क़ की इक ख़्वाब है न कर

दिल-सोज है अफसान-ए-इश्क़
तू यू न खुद को बर्बाद कर

वो मुलाकात वो सर्द बारिश की रात
याद है मुझे वो शर्म-ओ-हिजबात की रात

वो शिक़वे वो शिकायत की रात
याद है मुझे साया-ए-गेसू में बिताई रात

चाँद सितारे ख़ामोश चलती फिजाएं
याद है मुझे वो मुहब्बत भरी रात

हिज्र का ये सफ़र ख़त्म हो जायेगा
फ़िर आयेगी प्यार भरी रात

यूँ तो ज़माने में सभी को गम हैं,
किसी को ज़्यादा किसी को कम हैं !
एक ग़म तो मैं भी लिए बैठा हूँ,
इंतज़ार-ए-मोहब्बत में शराब लिए बैठा हूँ !
तू लौट आएगी किसी और की बाँहों से,
रात ढल गयी यही ख्वाब लिए बैठा हूँ !!

अपने बेवफापन की यूँ तो नुमाइश ना कर,
मेरे इश्क़ की यूँ तो अजमाइश ना कर !
मुझे जी लेने दे अपने यादों के सहारे,
तू इन्हें भूल जाने की फ़रमाइश ना कर !!

तू डालता जा साकी शराब मेरे प्यालों में।
तू दाल्टा जा साकी शराब मेरे प्यालों में।🍷
जब तक वोह ना निकले मेरे ख्यालों से।💃

जिन्दगी दो दिन की है, पर ये रात कटती ही नहीं,
हिज्र-ए-ऱाह से मेरी आँख हटती ही नहीं !
सांसें क्या हैं तेरे बगैर, एक विष का प्याला है,
फ़क़त बात ये है, मौत यूँ ख़ैरात में बटती ही नहीं !!

ग़ज़ल लिखू शायरी लिखू
तू बता तेरे इश्क़ मे क्या क्या लिखू

दिन को रात,रात को दिन लिखू
सहर को शाम,शाम को सहर लिखू

जानता हु जाना तू बेवफ़ा है
लेकीन तू बता तुझे मै क्या लिखू

तेरे उपर क़िताब लिखू ,ग़ज़ल लिखू
तुझे इख़्तियार दे दिया है तू जो कहे लिखू

तेरे मेरे मुहब्बत के फसाने लिखू
या तूने किये हुए सितम लिखू

जाना तू बता अब मै तेरे लिए
क्या क्या लिखू

Sad Shayari Latest
Sad Shayari Latest

इश्क़ में ऐसे भी मरहले आते है
कभी कही यार जुदा हो जाते है

ये जानकर भी के काटो भरी राह है
फ़िर भी मुहब्बत कर जाते है

जिसे कद्र नही उसे सबकुछ मिला
कद्र करने वालो को कुछ न मिला

फ़िक्र नही सर कलम कर दो ज़िस्म से
दीवाने है मुहब्बत करते रहेगे

न शौक मंज़िल का न जुस्तजू किसी की
हम खानाबदोशों का यहा कोई नही

तमाम उम्र सफ़र मे गुजर गयी हमारी
उम्र के आखरी पड़ाव तक कोई साथ न रहा

तआरुफ़ हम क्या दे अपना किसी को
मुलाक़ातें हमारी किसी से अब होती नही

भीड़ से अलाहिदा होकर चलना आदत है
हम तन्हा ही अच्छे है ज़रूरत किसी की नही

सुना है लोग तुम्हे नज़र भर के देखते हैं
चलो हम तुम्हारे शहर में आकर देखते हैं

सुना है रब्त से चीड़ बहोत है तुम्हे
चलो अब हम तुम्हारे क़रीब आकर देखते हैं

सुना है दर्द भी तुमसे पनाह मागता है
चलो आज हम दर्द लेकर देखते है

सुना है तुम्हे भी है शायरी का बड़ा शौक
चलो आज हम तुम पर ग़ज़ल लिखते है

सुना है तुम्हारे लफ्ज़ो में अंगारे है
चलो आज हम जलकर देखते है

सुना है चाँद रात भर दीदार करता है तुम्हारा
चलो आज हम चाँद की तरहा कर के देखते है

सुना है भवरे तुम्हे परेशा करते है
चलो आज हम जुगनू बन के देखते है

सुना है बड़ी नशीली है तुम्हारी आँखे
चलो आज इन आँखों मे डूब के देखते हैं

सुना है तुम्हारे लबो से शहद टपकता हैं
चलो आज हम शहद चख के देखते हैं

दूर रहकर फ़िक्र न करो क़रीब आकर हक़्क़ जताओ
बातें अधूरी रह जाएगी तुम क़रीब आकर
गुफ़्तगू करो

Sad Shayari Latest
Sad Shayari Latest

इक मुद्दत से तमन्ना हैं तुम्हें देखने की
आज मैं होश में नही हु तुम तस्वीर भेजों

तुम्हारी याद से भड़कते है दिल के जज़्बात
जान ले लेंगे मेरी ये अब तुम आ भी जाओ

इस क़दर हमसें दूर रहने की ज़रूरत ही क्या
ज़िन्दगी भर का साथ हैं अब तुम मेरे क़रीब आओ

शोला था आग का गोला था
मुझे अब तुम आवाज़ न दो

मैं कबका मर चुका हु जाना
अब तुम मुझे सदाए न दो

ज़हर जो मैंने पिया था जाना
तुम्ही ने मुझे दिया था जाना

ये औऱ बात है के सलामत हु मैं
ए बेवफ़ा तू मुझे वफ़ा का वास्ता न दे

कही ऐसा न हो के मैं पलट के कुछ कह दु
तू अब मेरी नजरों से दूर हो जा

अब मुझे तेरी मुहब्बत पर यकी नही जाना
अब मैं ये नही कहूगा के तुम मुझे प्यार दो

धूप में निकलो पसीने में नहा कर देखों
ज़िन्दगी क्या हैं किताबों से मत सिखों

सिर्फ़ आँखो से ही दुनियां नही देखी जाती
कभी धोखा खा कर भी देखो

दिल में भी इक ज़ुबा होती है यारों
कभी अपने दिल से भी बात करो

वो चाँद हैं उसे वैसा ही रहने दो
उसमे किसी की शक़्ल तलाश मत करो

धूल आँखो में भी झोंकते है यहा लोग
तुम्हे कुछ नज़र न भी आए तो भी देखो

मुझ जैसा तुम्हें दोबारा नही मिलेगा
मुझे छोड़कर मत जाओ
मैं तुम्हें दोबारा नही मिलूंगा

फ़िर याद आयेगी तुम्हे मेरी देखना
जब तुम नंगे पांव धूप में चलोगे

मेरी बातों को तुम हल्के में मत लेना
मेरे जैसा चाहने वाला तुम्हें नही मिलेगा

दुनियां की चमक धमक में दीवाना न बन
जब घर नही मिलेगा तो मेरा घर याद आयेगा

सोच समझ कर फैसला करो तुम
ग़र मेरे दर से गए तो ये दर कभी नही मिलेगा

कहा से सफ़र शुरू किया था
कहा ख़त्म करना हैं याद नही

जो मिला वो याद रह गया मुझे
जो न मिला उसके भूल गया मैं

मेरी नसीब की बारिश किसी औऱ
के छत पर गिरी
मेरी बात मान इरफ़ान तू उसे भूल जा

मैं उसके ही ख़यालो में खोया रहा
उसके ही बारे में सोचता रहा
सब ने आकर कान में कहा उसे भूल जा

न उसकी आँखों मे अश्क़ है
न उसकी आँखें है नम
वो मुझे कबका भूल गया हैं

ज़िन्दगी अटकी पड़ी हैं अब भी
उसकी फ़िराक में
जो ग़म उसने दिया मैं वो भूल गया

वो चाँद की तरहा मिला था मुझे
आसमान में
मैं इक सीतरे की तरहा टूट कर
नीचे गिर गया

★अज्ञात…✍★:
🌺

●आवाज का लहजा
एक पल में बता देता है कि…
रिश्ता कितना गहरा है●

Sad Shayari Latest
Sad Shayari Latest
     सुप्रभात 

अब वो गलियाँ वो मकाँ याद नहीं
कौन रहता था कहाँ याद नहीं
जल्वा-ए-हुस्न-ए-अज़ल थे वो दयार
जिन के अब नाम-ओ-निशाँ याद नहीं
कोई उजला सा भला सा घर था
किस को देखा था वहाँ याद नहीं
याद है ज़ीना-ए-पेचाँ उस का
दर-ओ-दीवार-ए-मकाँ याद नहीं
याद है ज़मज़मा-ए-साज़-ए-बहार
शोर-ए-आवाज़-ए-ख़िज़ाँ याद नहीं

मय-खाने में अक़्सर हम अपना ठिकाना भूल जाते हैं
होश नही रहता हम घर जाना भूल जाता हैं

असबाब तो मिल ही जाते है तक़दीर के जिद्द के आगे
जाम जो रखा होता है सामने हम वो उठाना भूल जाते हैं

आए थे बिखरी ज़ुल्फो के साथ वो हमारे मऱकद पर
अश्क़ आँखो से टपकाए लेक़िन फूल चढ़ाना भूल गए

चाहता था मैं उनकी आँखों से आँखे मिला लू
मौका अच्छा था लेक़िन हम आँख मिलाना भूल गए

न जाने चुपके से किसने कह दिया शेर हमारा
हम जाम पीना भूल गए ग़ज़ल लिखना भूल गए

दर्द,ग़म,तक़लीफ़ देते हो
हाय,तुम बड़ा ज़ुल्म करते हो

देख कर राह में पूछ लेना हाल,
इतना ही तुम करम कर दो

तुम्हारे चहेरे पर ये उदासी कैसी,
इसकी वजहा भी मैं तो नही

मरना चाह रहा हु मैं तुम मरने नही देते
तुम मेरा जीना मुश्किल करते हो

अब क्या कहु मैं तुमको
तुम हर बार दिल तोड़ जाते हो

नही याद कोई सुलगाते हुए सिगरेट
मैं तुझे भूल गया पीते हुए सिगरेट

सो यू हुआ के तेरी बेरुख़ी में पीने लगे
ग़म-ए-बेवफ़ाई से मुँह मोड़ते हुए सिगरेट

हम कितने अकेले है इस जहाँ में
पीते है ये सोचते हुए सिगरेट

ऐसे जुदा होंगे हम कभी सोचा नही था
वो मेरे से चला गुजर जाएगा सोचा न था

वो इत्र की महक की तरहा फैला था मेरे
चारो ओर
महसूस तो कर सकता था लेक़िन छू नही
सकता था मैं

रात आवाज़ उसकी गुज़ती रही मेरे कानों में
उठकर देखा तो मेरे क़रीब कोई न था

Sad Shayari Latest
Sad Shayari Latest

उसकी तस्वीर लेकर मैं शहर शहर घुमा
लेक़िन वो मुझे कही नही मिला

उस से मिलने की आस में मैं जागता रहा
मेरी सुर्ख़ आँखो ने सारे राज़ खोल दिये

ये अकेलापन उसके जुदा होने से था
मैं तन्हा था शहर भरा पड़ा था

सैकड़ो शेर जेर-ए-लब में बंद थे
एक पत्थर था दिल पे खामोशी का जो हटा नही

मजबूरियों ने हमे अज़नबी बना दिया
वरना वो हमें न पहचाने ऐसा कभी नही हुआ

ज़ब्त कर मुस्कुराह ख़ुद को भूल जा
इरफ़ान तू ऐसा कर उसको भूल जा

मज़हब-दर-मज़हब हमसफ़र हो कर
अज़नबी तू उस अज़नबी को भूल जा

वज्ह-ए-जाँ कनी थी जो बात
तू ऐसा कर उस बात को भूल जा

अहद-ए-वाबस्तगी में ज़िन्दगी न गुजार
वज्ह-ए-वाबस्तगी को तू भूल जा

सब दलीलें तेरी सारी सही हैं
अब तू ऐसा कर उस बहस को भूल जा

जेहानत बड़ी तेज़ हैं तेरी इरफ़ान
तू सब याद रख उस इक शख्श को भूल जा

सब से पुर-अम्र वाक़िया हैं ये ज़िन्दगी का
ऐसा कर तू अब मुहब्बत भूल जा

कहकहे लागते फ़िर तू दीवाने ज़िन्दगी के
तू अब हर-ग़म-ज़िन्दगी को भूल जा

ख़्वाब था तेरा वो इरफ़ान जिसे तूने चाहा
लम्हा-दर-लम्हा तू अब ख़्वाब को भूल जा

दिल में मिरे यादें तीरे यू आती हैं
जैसे बंदे को खुदा याद आता हो

एक इक कर के तिरे बातें याद आती है
ऐसे जैसे के तू मुख़ातिब हो मिरे से

जाम-ए-मय भरो लव चराग़ की तेज करो
सू-ए-मय-ख़ाना सफ़ीरान-ए-हरम आते हैं

कुछ हमीं को नही तिरे मुहब्बत उठाने का दिमाग़
वो तो जब आते हैं माइल-ब-करम आते हैं

इक पल न गुज़रे शब-ए-फ़ुर्क़त से कहो
दर्द महसूस नही होता रोज जख़्म दिया करो

★अज्ञात…✍★:
अगर मेहनत करना सीख गये,
तो जितना भी सिख जाओगे।
══━━━✥ ❉ ✥━━━══
सुप्रभात

मेरी नजरों की तरफ देख
जमानें पर न जा,
इश्क मासूम है
इल्जाम लगाने पर न जा।

वो नही है ज़िन्दगी में तो कुछ न रहा
सिलसिला-ए-तन्हाई बाकी रह गया

क्या गुफ्तगू करू मैं किसी से
दिल-शिकस्ता ख्वाइशों का मर्कज हुआ

ज़ख्म हरे हुए सारे हादसे याद आ गये
ज़िन्दगी धुआँ हुई वो वाकिया रह गया

यू तो उसने मुझे भूला दिया है दिल से
लेक़िन उसकी ज़िन्दगी में इक कमी रहेगी

इक़रार से इंकार तक की सरगोशियां
सब टूट कर बिखर गया फासला रह गया

सदमे में आज भी हु मैं उमर
तुझसे जुदा होकर तुझे सोच सोच कर
अब भी परेशा हु मैं
वजूद मेरा बिखरा पड़ा है मेरे ही घर में
तू नही है फिर भी तुझे तलाश करता हु 
हराम है इसलिए खुदकुशी नही करता मैं
इक अरसे से दफ़्न हु जिस्म की कब्र में मैं
कैसे बुलाऊ तुझे कैसे पुकारू तुझे मैं
जानता हु तू आएगा नही अब लौट के
इस तरहा लिखुगा मैं तेरा नाम
दुनिया भी तुझे याद करेगी उमर तेरे नाम से
रास्ता बडा तवील है तेरे पास आने का उमर
मैं अभी से सफ़र की तैयारी में लगा हु 

Sad Shayari Latest
Sad Shayari Latest

मुक्कमल यहाँ कोई चीज़ नही मिलती
आसमा को जाकर ज़मी नही मिलती

हर शख्श का अपना अलग मिज़ाज हैं
जिसको जिसकी तमन्ना हो वो चीज़ नही मिलती

तोहफ़े दो या गुलाब दो चाहे तुम जाँ दो
मुहब्बत तो होती हैं सनम नही मिलते

ये भी क्या अज़ाब नाज़ील हुआ हैं
हमसफ़र तो मिल गया हमनशीं न मिला

चिराग़ जलते ही फड़फड़ाने लगता हैं
उजालों को उजाला नही मिलता हैं

मेरा इम्तिहाँ लोगे क्या जो नही किया
उस गुनाह की सज़ा दोगे क्या जो नहीं किया

मेरी हर बात पर ऐतराज़ है तुम्हें
क्या कोई नुक्स हैं तक़रीर में क्या

अपनी कमियां छुपाते हो मेरी बताते हो
मुहब्बत में कोई ऐसा करता है क्या

अभी शाम भी नही ढली तू रूठा बैठा हैं
बता मुझसे कोई ख़ता हुई है क्या

 बात क्यू नही करते तुम मुझसे 
 जुबाँ में छाले पड़ गए है क्या

यू तिरछी निगाह से क्यू देख रहे हो मुझे
बताओ तुम्हारे जहन में क्या चल रहा है

झुकी झुकी सी उसकी नज़र बे-करार करती हैं
दबा दबा सा ही सही वो मुझसे इश्क़ करती हैं

दिल की धड़कनों को तू गिन के बता
मेरी तरहा उसका भी दिल बे-करार हैं

वो पल जिस में इज़हार इक़रार होता हैं
उस पल का इंतेज़ार उसे भी हैं मुझे भी हैं

तेरे लिए ठुकरा रहा हु मैं औरो को
तू मुझे जवाब दे तुझे मेरा ऐतबार है के नही

हाय,क्या मौत मागी तूने बन्दा-ए-खुदा
वक़्त-ए-तहज्जुद सज्दा-ए-खुदा रूह कब्ज़

राज़ी-ए-खुदा हो राज़ी-ए-मुहम्मद हो तुझसे
मग़फ़िरत-ए-दुआ करू मैं तेरे लिये

महक उठा सारा शहर खुशबू-ए-क़फ़न से
आशिक़ जा रहा था माशूक से मिलने के लिये

मऱकद में ग़ुलाब बिछे हैं इस्तेकबाल के लिए मलाइका आ खड़े हैं
बंद हो क़ब्र तो गुफ़्तगू का आग़ाज़ हो

रोशन दान लगा हुआ हैं सीरने से
दाएं बाएं से ठंडी हवाएं आने लगी हैं

आराम-ए-आशिक़ के लिए माशूक ने
इंतेजाम किया हैं
जन्नतुल-फिरदोस का बिस्तर बिछाया हैं

हाय क्या हुस्न-ओ-ज़माल बख्शा तुझे
खुदा ने
तक रही हैं हूरे तुझे जन्नत के महलों से

नींद-ए-सुकू से जब तू जागेगा बन्दा-ए-खुदा
तेरे उपर होगी इनामात-ए-बरसात

मोतियों से जड़ा हुआ सुफेद लिबाज़
पहनाया जायेगा तुझे महशर में

सातों किवाड़ खुले होंगे तेरे लिए
जिस से तू दाख़िल हो जाये मर्ज़ी तेरी

Sad Shayari Latest
Sad Shayari Latest

गारा-ए-मुश्क से बनी दीवारे याक़ूत जड़े गए हैं जिनमें
बड़े बड़े कमरों वालों महल दिया है तुझे

इस्तेकबाल-ए-आका के लिए खड़े है
खुदाम खड़ी हैं हूरे इंतेज़ार में
फूल बरस रहे हैं इत्र छिड़का जा रहा हैं
ज़िस्म पे तेरे

Sad Shayari Latest for girlfriend

न मिलते इतने सारे इनामात तुझे कभी
बन्दा-ए-खुदा
ये करम हैं उस करीम का ये रहम हैं
उस रहीम का ये इनायत हैं उसकी
जो कुछ तुझे मिला रब के फ़ज़ल-ओ-करम से मिला

शुक्र अदा कर सज्दा-ए-खुदा कर
उसने गुनाहगारो को बख्श दिया हैं
मुहम्मद के सदके में

🌺

“संसार में ऐसी कोई भी
समस्या नहीं है जो आपके
मन की शक्ति से
अधिक शक्तिशाली हो।”

🚶🚶🚶:
💔💔💔💔💔💔💔💔
इश्क करना चाहते थे हम,
एक दोन हो गया.
आगे चलकर पता चला की बेवफा मिल गया.
💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔

जिंदगी गुजर रही है एम्तीहानो
के दोर से.
एक जख्म भरता नाही दुसरा
तयार मिळता हे.

हिज्र की रात भी बड़ा करम करती हैं
यादें उसकी ताज़ा कर सितम करती हैं

अभी सफ़र बड़ा तवील तय करना हैं
वो मेरे साथ नही मुझे अकेले चलना हैं

अनगिनत मुश्किलातों से मुझे लढना हैं
उसके शहर पहोच कर मुझे उसे ढूढना हैं

मेरा दिल खुश हैं मेरी अक्ल परेशां हैं
ए खुदा तू ही बता ये माजरा क्या हैं

आँखें थक गई है आसमान को देखते देखते
पर वो तारा नहीं टूटता ,जिसे देखकर तुम्हें मांग लूँ

तेरी बेवफ़ाई का कोई मलाल नही हैं
तूने जो किया वो कोई कमाल नही हैं

वाज़िब को नफ़्ल करार दे दिया
एक सिरा पकड़ा दूसरा छोड़ दिया

चल अब तू अपना हुन्नर दिखा
निकाल दिया तुझे दिल से अब तू
दिल मे जगहा बना के दिखा

उसके शहर का रास्ता याद हैं

मुझे उसके शहर का रास्ता अब भी याद हैं
मैं एक खानाबदोश हु वो मुझे भूल गया हैं

मेरी आँखो में अब भी उसका चहेरा हैं
कमजोर हैं नजर उसकी वो मेरी शक़्ल भूल गया हैं

मैं जिस से भी मिलता हु वो मुझे याद रहता हैं
यादाश्त कमज़ोर है उसकी वो मुझे भूल गया हैं

मुहब्बत में जो डूबा हुआ है उसे किनारे से क्या लेना देना हैं
इसकी गहराई में जाने के बाद किसे साहील याद रहता हैं

डूबा हुआ लहरों के साथ बहकर आया हैं
देखने वालों को दरिया का नज़ारा याद हैं

आवाज़े एक जैसी ग़र हो याद नही रहती हैं
मुख्तिलिफ़ ग़र किसी ने पुकारा याद रहती हैं

हमेशा तेरे साथ रहूगा तुझे डरना नही हैं
मुश्किलें बहूत आयेगी तुझे घबराना नही हैं

हमे अब ज़माने से मुक़ाबला करना हैं
मज़हब के ठेकेदारों से जितना हैं

हम पर ज़ुल्म-ओ-सितम बहोत होने हैं
सब्र का दामन हम दोनों को थामे रखना हैं

ये अपने अपने नही दुश्मन मुहब्बत के हैं
हमारे लिये इन के दिल में नफऱत हैं

लैला मजनूं, हीर रांझे के जैसा मरना नही हैं
तुम औऱ मैं दुआ करेगें हमे एक रोज़ मिलना हैं

नाम हमारा सुर्ख़ शियाही से लिखना हैं
मिटा ना पाये कोई इतना गहरा लिखना हैं

रोज़ ख्वाबों में आया करता था
वो शख्श मेरी आँखों मे रहा करता था

वो मुझे अपने गले लगाकर
मेरे कानों में मुहब्बत का इजहार करता था

कैसा अजीब शख्श वो भी था
मुझसे जुदा होने से डरता था

शहर में तेरे नाम का चर्चा हो रहा हैं
एक कहता है मेरा हैं दूजा कहता मेरा हैं

हम भी वही खड़े थे सब सुना हमने हैं
हस कर खुद से कहा देख वो कितनो का हैं

Sad Shayari Latest
Sad Shayari Latest

किस किस मिलते हो तुम पता करना हैं
हर शख्श तेरा दीवाना तेरा नाम लेता हैं

शहर को छोड़ गाँव जाकर बसना हैं
अब मुझे तेरी हरकतों से बचना हैं

कारनामो से तेरे आँखो में अश्क़ हैं
सफ़ाई न दे तू मेरे पास गवाह हैं

Sad Shayari Latest

तकिया जो बीच लगाया पिछली रात
तेरे बीन हमे नींद नही आयी उस रात

जुदाई से लढाई करता रहा उस रात
तुमने मुझे बहोत तड़पाया उस रात

आते ही क़रीब तुम्हारे शर्म हया भूला हु
अब तुम्हे नही छोडूंगा मैं सारी रात

मैं ब-ख़ूबी जानता हु तुम्हारे दिल की बात
अब मैं तुम्हें प्यार करता रहूगा सारी रात

उस शाम तुमने क्यू छुड़ाया था हाथ
दुख रही थी क्या कलाई तुम्हारी उस रात

हसरत से यू न क़रीब आओ तुम मेरे
देखो फ़िर ख़त्म नही होगी प्यार की रात

तू अपना दर्द गम तक़लीफ़ मुझे दे दे
तुझे मेरी क़सम इस दिल के वीराने मुझे दे दे

जानता हु मैं के इस क़ाबिल नही हु
बुरा ही क्या हैं ये दुख तू मुझे दे दे

मैं जानना चाहता हु जख़्म क्या होता हैं
थोड़े दिन के लिए ही सही ये जख़्म मुझे दे दे

वो जो तेरा था तुझे नही मिला
मैं तुम्हें मिला दूगा तू उसका पता मुझे दे दे

तू इसकी उसकी बातें न किया कर
तू मुझसे अपनी बातें किया कर

जो हैं तेरे मेरे दरमियां
तू मुझसे उसकी बातें किया कर

दर्द गम तक़लीफ़ न दिया कर
तू मुझसे सिर्फ़ प्यार किया कर

इऱफान को कोई गीला नही तुझसे
तू इरफ़ान से इरफ़ान की बात किया कर

अब मैं खुद सवरना चाहता हूँ
आज मैं खुद सजना चाहता हूँ

अश्क़ मैं आँखो में नही चाहता हूँ
मैं बूदों को मोती बनाना चाहता हूँ

दर्द ग़म अब मैं नही चाहता हूँ
मैं बीते कल नही जाना चाहता हूँ

ज़िन्दगी में अँधेरा मैं नही चाहता हूँ
मैं एक नयी शमा जलाना चाहता हूँ

किसी की बाहों में मरना चाहता हूँ
मैं मौत भी आशिक़ाना चाहता हूँ

जाग रहा हु मैं सितारों तुम सो जाओ
खड़ा हूँ मैं यहाँ नजारों तुम सो जाओ

हँसो मुस्कुराओ किसी के खयालों में खो जाओ
मुझी पर ये रात भारी हैं बहारो तुम सो जाओ

मुझे तो हर रात जागना ही है
ये किस्मत मेरी हैं दुनिया वालो तुम सो जाओ

तुम्हें तो मिलने आते रहते है अपने सभी
मैं हारा हुआ हूँ लोगो तुम सो जाओ

मेरा हाल मेरी दर्द किसी को न सुनाओ
ये राजदारी मेरी हैं तुम ख़ामोश सो जाओ

हमे भी एक न एक दिन नींद आयेगी सो जायेगे
अभी दर्द गम बहोत हैं ऐसा करो तुम सो जाओ

आज उनसे तुम्हारी मुलाकात हो गई
लगता हैं आज जोरो से बरसात हो गई

वीरानों में ही आज मेरी शाम हो गई
यार मुझे घर आते आते रात हो गई

यू भी तन्हाई से आज मेरी बात हो गई
न नजरें मिली न ओठ हिले बात हो गई

ज़ालिम ज़माने से शिकस्त मेरी हो गई
बाज़ी वो जीत गये मेरी मात हो गई

अँधेरा हुआ रात हमको निगलने हो गई
आसमा देखों चाँद चाँदनी की मुलाकात हो गई

मेरा गाँव आना अच्छा ही हुआ
आज एक ज़माने के बाद उनसे मुलाकात हो गई

ज़िन्दगी के मेले में ख़्वाहिशों के रेले में
तुमसे क्या कहे जाना इस कदर झमेले में

वक़्त की रवानी हैं, वक़्त की गरानी हैं
सख़्त बे-ज़मीनी हैं,सख़्त ला-मकानी हैं
औऱ हिज्र के समुंदर में
तख़्त औऱ तख़्ते की एक ही कहानी हैं

अपने अंदर से अहंकार को निकाल
कर…
स्वयं को हल्का कीजिये, क्योंकि ऊँचा
वही उठता है जो हल्का होता है

वक़्त की रवानी हैं, वक़्त की गरानी हैं
सख़्त बे-ज़मीनी हैं,सख़्त ला-मकानी हैं
औऱ हिज्र के समुंदर में
तख़्त औऱ तख़्ते की एक ही कहानी हैं

तेरे सिवा कोई मेरे जज़्बात में नहीं,
आँखों में वो नमी है जो बरसात में नहीं,
पाने की कोशिश तुझे बहुत की मगर,
तू एक लकीर है जो मेरे हाथ में नहीं।

Sad Shayari Latest
Sad Shayari Latest