shayari shakeel azmi, शकील आजमी best shayari

हिंदुस्तान के शायरों में एक मशहूर शायर Shakeel Azmi भी है. Shakeel Azmi की shayeri बहुत ही लाजवाब और बेहतरीन है.shayari shakeel azmi की पसदीदा शायरी मिल जाती है. यहां पर हम shayari shakeel azmi की देखने वाले हैं.

Shakil Azmi

कुछ इस तरह से मिले हम के बात रह जाए

बिछड़ भी जाऊं तो हाथों में हाथ रह जाए

मैं सो रहा हूं तेरे ख्वाब देखने के लिए

खुदा करे मेरी आंखों में रात रह जाए

करीब आते हुए इतने पास हो गए थे

के फिर बिछड़ते हुए हम उदास हो गए थे

हवस को इश्क में शामिल नहीं किया हमने

वह जब भी जिस्म बना हम लिबास हो गए थे|

Shakil Azmi

बादलों की तरह बारिश की कहानी में रहो

तुम मेरा गम हो मेरी आंखों के पानी में रहो

मुझको मालूम है तुम इश्क नहीं कर सकते

तो हवस बनके मेरे जिस्म के मानी में रहो|

मैंने फेंका नहीं टूटे हुए आईने को

ताकि तुम बिखरे हुए मेरे निशानी में रहो|

जो चल रहा है निगाहों में मंजिलें लेकर

वह धूप में भी कहां साहिबान देखता है

हर घरी चश्मे खरीदार में रहने के लिए

कुछ हुनर चाहिए बाजार में रहने के लिए

ऐसी मजबूरी नहीं है कि पैदल चलो मैं

खुद को गरमाता हूं रफ्तार में रहने के लिए

मैंने देखा है जो मर्दों की तरह रहते थे

मसखरे बन गए दरबार में रहने के लिए

अब तो बदनामी से शोहरत का वो रिश्ता है के

लोग नंगे हो जाते हैं अखबारों में रहने के लिए

कई दिन तक बहुत उलझन थी दिल में, कई दिन तक मुसलसल मैंने ये सोचा कि मेरी इस तबाही मैं तुम्हारा हाथ कितना है, अगर मैं तुमसे बदला लूं तो कितना लूं, कहां और किस तरह मारूं तुम्हें, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला मैंने अपनी सारी उलझन को खुदा के रूबरू रहकर तुम्हें अक्सर भुला डाला।

हाल दिल का उसे सुनाते हुए

रो परा था में मुस्कुराते हुए

भीगती जा रही थी एक लड़की

बारिशों में नशा मिलाते हुए

आसमां तक चला गया था मैं

एक दिन रास्ता बनाते हुए

देर तक जब उदास रह लो तो

अच्छा लगता है मुस्कुराते हुए|

उसकी याद आए तो कुछ जख्म पुराने निकले

दिल की मिट्टी को कुरेदा तो खजाने निकले

शहर में करता था जो सांप के काटने का इलाज

उसके तहखाने से सांपों के ठिकाने निकले

मजहबी अंधेरा है रोशनी है खतरे में

खुलकर जीने वालों की जिंदगी है खतरे में

आशिकों की राहों में नफरतों का परचम है

इश्क पर है पाबंदी आशिकी है खतरे में

बादलों की साजिश में धुआं भी शामिल है

चांद बुझने वाला है चांदनी है खतरे में

अब हमारी बस्ती भी जंगली इलाका है

भीड़ है दरिंदों कि आदमी है खतरे में

जीवन पुस्तक फट जाती है कागज पीला हो जाता है

आंसू कोई लाख छुपाए दामन गीला हो जाता है

बच्चों के सच्चे जहनों में झूठी बातें मत डालो

कांटों की सोहबत में रहकर फूल नोकिला हो जाता है|

दिन भर तो दोनों मिलकर पानी शकर मिलाते हैं

रात आते ही सारा शरबत जहरीला क्यों हो जाता है