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अपने दिल को अक्सर सज़ा देता हूँ मैं
अपनी बर्बादी पर खुद मुस्कुरा देता हूँ मैं

दिल के खून से फूल खिला देता हूँ मैं
रेगिस्तान में गुलिस्तां खिला देता हूँ मैं

बड़ी अजीब सी जगहा आ पहुँचा मैं
काफ़िले से बहूत दूर आ चुका हूँ मैं

क्यू नाम लेकर उसकी रुस्वा करू मैं
दिल की आग की ऐसे ही ठंडा करता हूँ मैं

ज़िक्र यू करता हूँ ख़ुद से अपने ग़मो का मैं
होश में जो होता हैं उन्हें बेहोश करता हूँ मैं

Zindagi sad Shayari
Zindagi sad Shayari

वो गया तो ऐसे गया वो मुझे पागल कर गया
बेजुबां बोलने लगे हैं वो सबको ज़ुबा दे गया

इक उसके यू जाने से मैं ग़मगीन सा हो गया
मैं मुड़ मुड़ के उसका ही रास्ता तकता रह गया

दुनियां एक ख़्वाबगाह हैं हक़ीक़त कुछ औऱ हैं
वो हमारे दरमियान में फ़ासले बहूत कर गया

सब कुछ जानता हूँ लेक़िन मैं ख़ामोश सा हूँ
उसने मुझे धोखा दिया हैं मैं धोका खा गया

कौन दे रहा हैं यू अचानक सदाए मुझ को
रात में ख़्वाब उसका अचानक आ गया

उस से अब कुछ पूछने की ज़रूरत ही नहीं
वो हलके से मुस्कुराकर सब कुछ बता गया

दे तो दिया हैं उसने मुझे अज़ाब ए जुदाई
लेक़िन वो अपनी यादें मेरे पास छोड़ गया

मेरे बाद मेरे जैसा कोई नहीं आयेगा
तेरे दर पर मेरा साया नहीं आयेगा

तूने भर पुर नज़र डाली हैं गैरों पर
अब मेरा दिल तेरे पास नहीं आयेगा

तूने तो क़त्ल किया हैं मेरे भरोसे का
अब मुझे तुझ पर ऐतबार न आयेगा

जब चलेगी कहीं किसी बात शाइर की
तेरे होठो पर मेरा नाम जरूर आयेगा

तू हर तरहा से सोचेगा मेरे बारे में ही
लेक़िन मेरा ख़याल तुझे नहीं आयेगा

रिश्ता टूटा हैं अपनों से अपनों का
तुम्हें खेल दिखाता हु तक़दीर का

यहीं तो हासिल हैं मेरी तहरीर का
ख़ुद के ख़्वाब ख़ुद ही तोड़ने का

बन गया हु इश्तियार अख़बार का
आदी हो गया मैं ख़ुद को पढ़ने का

जरिया नहीं इस क़ैद से निजात का
तंग होने लगा हैं हल्का जंजीर का

सच तो ये हैं के यहीं तक़दीर हैं मेरी
मैं अक़ीदत मंद हु दर्द ग़मो का

बूंद को समंदर समंदर को बूंद कहना
मैं मुहब्बत नहीं समझता सब से कहना

तेरी इस सोच इस तोहमत को सलाम
बड़ा आसान सा हैं ये दूर से ही कहना

मुहब्बत के बदले जफ़ा ही मिलती हैं
वो तब्दील हो गया हैं उस से क्या कहना

गुफ़्तगू ही नही बरसो से दोनों के दरमियां
अब उस से कोई सवाल कैसा कहना

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दिल ओ दिमाग़ में कुव्वत न रहीं
तेरे अशआर में वो तासीर न रहीं
तेरे अश्कों में तो हक़ीक़त न रहीं
तेरे चहेरे में अब वो तासीर न रहीं

मैं आज सब्र के साथ चल रहा हू
मैं वक़्त का इंतेज़ार कर रहा हू
ये वक़्त कभी न कभी बदलेगा
मैं अभी हिसाब किताब कर रहा हू

सब का यहाँ हिसाब किताब होना हैं
मैं सब अपनी तहरीर में लिख रहा हू
करना हैं ज़ुल्म ओ सितम करो तुम
सब अपने जहन में हिब्ज कर रहा हू

पीठ पीछे भोकते हो मेरी भोक लो
मैं सामने से वार की तैयारी कर रहा हू
मज़ाक उड़ाते हो मेरा उड़ा लो तुम
मैं तुम्हें रुलाने की तैयारी कर रहा हू

मारना हैं मुझे तो अभी मार दो तुम
मैं अभी जंग की तैयारी कर रहा हू
वक़्त हैं बचा लो अब भी खुद को तुम
मैं लौटकर आने की तैयारी कर रहा हू

तुझे कैसे पता के मैं कौनसा नशा करता हू
अरे नहीं मैं नए नए फूलों का मज़ा करता हू

ख़ुदा ने जो भी किया हैं वो सही किया हैं
ख़ुदा कभी कोई ग़लती नहीं करता हैं

तुझे कैसे पता चला मैं जिस्मों का नशा करता हू
अरे नहीं मैं नए नए फूलों का मज़ा करता हू

Zindagi sad Shayari
Zindagi sad Shayari

मूर्खो से तारीफ सुनने से
बुध्दिमान की डाँट सुनना
ज्यादा बेहतर हैं

अज़नबी हू मुझे रास्ता बताओ
ये किस की चौखट हैं बताओ

आते ही लूट लिया हैं मुझे यहाँ
अब तुम यू मुहब्बत न जताओ

मेरी अपनी राह हैं मुझे जाना हैं
अज़नबी हू मुझे रास्ता बताओ

आईने के जैसी सिफ़त हैं मेरी
तुम मुझे अब कुछ न बताओ

फ़िर दोगे तुम मुझे दगा यहाँ
मैं कागज़ हू मुझे यू न उड़ाओ

मेरे जख़्म कुरेदोगे जानता हू
अब तुम मुझसे बात न बढ़ाओ

दर्द ग़म दिल से निकालू कैसे
वो तो मेरा हैं उसे भुलाऊँ कैसे

सब ने उसे भूला दिया हैं अब
मैं उसे अपने दिल से भुलाऊँ कैसे

खो जाता हूँ मैं उसके ख़यालो में
उसकी मुहब्बत दिल से निकालू कैसे

जो अपने हैं पराए बन गए हैं
अब उसे मैं वापस लाऊँगा कैसे

इक अरसे से प्यास बैठा इरफ़ान
अब इस प्यास को बुझाओ कैसे

तेरे आँगन से गुज़र कर ये फ़िज़ा आती हैं
महक तेरी लेती हुई ये फ़िज़ा आती हैं
क्या बात हैं निगाहों में तुम समा जाती हो
तुम्हें दिल में घर करने की अदा आती हैं

दिल की बातें मुझे करनी नहीं आतीं हैं
लेक़िन तुम्हें महसूस करने की अदा आती हैं
खा रहा हैं तुम्हारा इश्क़ मुझे अंदर अंदर
तुम्हें इस बीमारी की दवा भी आती हैं

कहाँ रूके कहाँ से हम दम करें
तू तो कहीं भी नज़र नहीं आतीं हैं

ग़म मेरा बढ़ता जा रहा हैं
दिल मेरा तड़पता जा रहा हैं
इसलिए मैं ख़ामोश रहेता हू
वो मुझे छोड़कर चला गया हैं

मेरी आँखों से पानी जा रहा हैं
वो ख़्वाब मेरा टूटता जा रहा हैं
वो ग़मो का महल बना रहा हैं
वो मुझे रुलाकर जा रहा हैं

कब तक हम यू सब्र करे
वो हमें अब याद आता जा रहा हैं

रास्ता मुश्किल हैं मुसीबतें बहूत हैं
लेक़िन मंज़िल से मुहब्बत बहुत हैं
ख़ेमे रास्ते में हमनें कही नही डालें
ज़ख्मी हू लेक़िन चलने का शौक़ हैं

वो मेरा मुंतज़िर-ए-शब तो हैं ही
लेक़िन सुबहा चलने में दिक्कत हैं
वो भरी बरसात में आकर मिले तो
हमें उस से मुहब्बत बहूत हैं

ये मौसम हमें कमी ही रास आए हैं
बरसात से हमारा झगड़ा पूराना हैं
हमारा बिछड़ना तो लाज़मी ही था
कुछ इसमें अपनों साज़िश भी हैं

इस तर्क ए तालुक से परेशा हु मैं
लेक़िन मुहब्बत दरमियां बहुत हैं
ख़ुशी ख़ुशी आए थे हम शहर में
यहाँ लोग मुहब्बत के आदी नहीं हैं

ज़िंदा रहना हैं तो जिया कर
रौशनी के लिए धुआँ किया कर

सुबहा के साथ यू ना चला कर
कभी तो कही तू रात किया कर

ख़्वाब हक़ीक़त नहीं हैं इरफ़ान
सच के लिए तू शहर घूमा कर

क्यू रोता हैं रात भर उसके लिए
दर्द ग़र हैं तो तू बयां किया कर

मिल गया मिट्टी में तो क्या हुआ
अब तू ज़मी को सही किया कर

Zindagi sad Shayari
Zindagi sad Shayari

तेरी मुहब्बत रूह में तहलील न हो पाई
हम से जज्बातों की तशकील न हो पाई

हम तो ग़ैर हैं हम से तेरी फ़िक्र न हो पाई
हम से तेरे हुकुमो की तामील न हो पाई

बादलों ने छीन लिया सारा पानी आँखो का
आँखे भरी थी मेरी लेक़िन दरिया न हो पाई

हर रात टूटता हू बिखर जाता सा जाता हू
यार मेरी हालत में तब्दीली नहीं हो पाई

नींद के लिए सुबहा तक भटकता हू मैं
यार मेरे ख्वाबों की तकमील न हो पाई

मिल ही जाएगा कोई न कोई हमे चाहने वाला
तुम्हारे उपर कोई मुहर थोड़ी लगी हैं
दे ही देगा कोई न कोई अपना दिल हमें
तुम्हारे दिल में कोई जादू थोड़ी हैं

उन्हें देखते तो उनकी वैल्यू बढ़ जाती
हमनें उन्हें इग्नोर कर के उनकी वैल्यू कम कर दी

ग़ैर के पास हमारा ज़िक्र न करना
हम को बदनाम रुस्वा तू न करना

मेरा तो मुक्कदर हैं परेशान रहना
अक़्ल कहती हैं तुम दूर ही रहना

क्या ही ज़रूरत हैं तुम्हें सजने की
सज संवर के हमें दीवाना न करना

जानते हैं हम तेरे मिज़ाज कैसा हैं
तुम मुझ पर महेरबानी न करना

देख तुम्हें दिल में कुछ होता हैं
तुम यू नज़र मिलाया न करना

शायर समझ रहे हो दर्दो का मारा समझ रहे हो
ये तो मेरा शौक़ हैं तुम मुझे आवारा समझ रहे हो

आशिक़ समझ रहे हो इश्क़ का मारा समझ रहे हो
ये दो अदा हैं मेरी तुम मुझे मजनूं समझ रहे हो

मुर्दा समझ रहे हो दफ़्न करना हैं समझ रहे हो
ये तो हुन्नर हैं मेरा तुम मुझे मरा हुआ समझ रहे हो

पराया समझ रहे हो बेगाना समझ रहे हो
ये तो मेरा शहर हैं तुम मुझे मुसाफ़िर समझ रहे हो

आ रहे हो जा रहे हो कुछ भी बोल रहे हो
ये तो मेरा सब्र हैं तुम मुझे अपना आशिक़ समझ रहे हो

इश्क…
वो नादान परिंदा है….
जिसे तुम आजाद कर दो…
मगर लोटकर फिर तुम्हारे पास ही आयेगा…!

मैं जो कहता हूँ कि मरता हूँ तो फ़रमाते है.
कारे-इ-दुनिया न रुकेगी तेरे मर जाने से..

कौन हमदर्द है जंहा में किसी का अकबर.
एक उभरता है यंहा एक के मर जाने से..

Zindagi sad Shayari
Zindagi sad Shayari

अजीब अजीब लोग मिल रहे हैं मुझे
अब क्या तो भी बोलना तुझे

बरसों तक वो हमारे दिल में रहा
जब तक रहा वो फ़रेबी ही रहा
ऐसे भी रास्तों से गुजरना पड़ा
वो बदगुमान कभी साथ न रहा

हमनें ही मिटा दिये दिल से नुकूश
लेक़िन उसका नाम मुझे रखना पड़ा
धुंधले से हैं उसके निशां जहन में
लेक़िन अब वो आने से रहा

इऱफान ने दिये थे जिसे सारे हक़्क़
वो अब रौशनी करने से रहा

मुहब्बत गहरा जख़्म देती हैं
मुहब्बत न कर बर्बादी देती हैं

हिज़्र की लज़्ज़त ये देती हैं
इंतज़ार की घड़ियां भी देती हैं

तेरे अश्क़ मुहब्बत से क़ीमती हैं
मुहब्बत न कर बर्बादी देती हैं

मिलन की रुत पर एतबार न कर
ये सब झूठी बातें होती हैं

जान दे कर क़ीमत चुकानी होती हैं
मुहब्बत मिट्टी में मिला देती हैं

आज उसने मास्क पहना हैं
शायद उसे कोरोना का डर हैं
जल्वा फरमाए हैं लब दर्मिया
मंज़र-ए-आब-ओ-ताब उल्टा है

भटकता फ़िर रहा था मेरा ग़म शहर भर में
लिपट कर मुझसे बोला कहा जाउ शहर भर में तुझे ही जानता हूँ

इतने ख़ामोश भी रहा न करो
ग़म जुदाई में यूँ किया न करो

ख़्वाब होते हैं देखने के लिए
उन में जा कर मगर रहा न करो

कुछ न होगा गिला भी करने से
ज़ालिमों से गिला किया न करो

उन से निकलें हिकायतें शायद
हर्फ़ लिख कर मिटा दिया न करो

अपने रुत्बे का कुछ लिहाज़ ‘मुनीर’
यार सब को बना लिया न करो

यार उसने मुझे आने नहीं दिया
उसने मुझे शहर में घुसने नहीं दिया

जिस सम्त चला मैं काटे थे राह में
यार उसने मुझे चलने नहीं दिया

कुछ वक़्त हम उसका चाहते थे
यार उसने हमें वक़्त नहीं दिया

ख्वाहिश थी जिस चमन की हमें
उसने मुझे चमन में घुसने नहीं दिया

हम्द सना के बाद तेरा ज़िक्र आया
‘उमर’तेरे जाने के बाद मैं बहूत रोया

तेरी मुहब्बत ने सब कुछ बदल दिया
मैं बदल गया हालातो को बदल दिया

तेरे ग़म ने मुझे खोखला कर दिया
तेरी याद ने मुझे पागल कर दिया

आवारों की तरहा भटकता हूँ मैं
तेरी जुदाई ने मुझे मजनूं कर दिया

इऱफान पहले ऐसा तो था नहीं
तेरे हिज़्र ने मुझे आवारा कर दिया

जब भी तेरा नाम आएगा बेवफाओं में आएगा
तू सितमगर हैं तेरा नाम सितमगरो में आएगा
तूने जो किया हैं वो मैंने हिज्ब कर लिया हैं
उन सब का ज़िक्र अब मेरी ग़ज़लों में आएगा

तन्हाई की गली में यादों का शोर हैं
मैं आँखो से रो रहा हु अँधेरा सा हैं
सिने में मेरे कोई तीर पेवस्त सा हैं
दिल उदास औऱ मेरा कोई नहीं हैं

हम से पहले उसे किसी औऱ से प्यार था
यहाँ हम से पहले भी कोई औऱ आया था

यार उसे उसके दिल से कैसे निकालते
वो बड़ी दूर था औऱ मैं कहीं औऱ था

यारों जाने में हमें बड़ी देर हुई थी
तब तक वो किसी औऱ का हो चुका था

ये तो सब तक़दीर का खेल हैं यारों
वो शायद मेरी तक़दीर नहीं लिखा था

ख़ैर जो हुआ सो हुआ अब क्या ग़म करे
इश्क़ किया था उस से वादा निभाना था

बहुत मुश्किल है सभी को खुश रखना..
चिराग़ जलाते ही अंधेरे रूठ जाते हैं..!!

निसार ए यार भी लुत्फ देता है
बर्बाद होना इश्क़ में एक गुरूर देता है

इस अजनबी दुनिया में उम्मीदों का सहारा ले कर
हम तुम्हें फिर से चाहेंगे एक उम्र दोबारा ले कर।

Urdu shayari

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